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09 अक्टूबर 2010

मध्यप्रदेशःइंजीनियरिंग और फार्मेसी में पचास फीसदी अंक वाले भी पात्र

इंजीनियरिंग और फार्मेसी में लेटरल एंट्री के जरिए सीधे सेकंड ईयर में प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं को परीक्षा देना होगी। हालांकि इस बार लेटरल एंट्री की परीक्षा में फ‌र्स्ट डिवीजन का बंधन नहीं होगा। पचास फीसदी से डिप्लोमा या बीएससी करने वाले भी डिग्री कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने सत्र 2010-11 के लिए लेटरल एंट्री के जरिए होने वाली प्रवेश परीक्षा की तिथि घोषित कर दी है। इस बार यह परीक्षा 14 नवंबर को होगी। यह परीक्षा भोपाल व इंदौर सहित चार शहरों में होगी। इस परीक्षा को लेकर लंबे समय से उठापटक चल रही थी। हालांकि इसे लेकर छात्र-छात्राओं में पिछले साल तक काफी कम उत्साह था। इसकी वजह थी डिप्लोमा या बीएससी में 60 फीसदी अंकों का बंधन। बीएससी में तो साठ फीसदी से अंकों वाले मिल जाते थे, लेकिन डिप्लोमा में 60 फीसदी अंक वाले ढूंढे नहीं मिलते। इसके चलते पिछले साल साठ फीसदी सीटों के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिले थे। कुल सीटों की तुलना में महज 25 फीसदी उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी। इसे देखते हुए परीक्षा के आयोजन को लेकर ही उंगली उठ गई थी। छात्रों का उत्साह न देखते हुए विभाग ने भी प्रवेश परीक्षा खत्म कर सीधे प्रवेश पर विचार शुरू कर दिया था। मगर इस पर आम सहमति नहीं बन सकी। इसी का परिणाम है कि नियमों में संशोधन करना पड़ा। विभाग ने अब साठ की जगह 50 प्रतिशत अंक वालों को भी परीक्षा के लिए पात्र माना है। इसी प्रकार प्रदेश के छात्र-छात्राओं के लिए भी सीटें आरक्षित कर दी हैं। मुश्किल है छात्रों का मिलना : इस बार भी लेटरल एंट्री के लिए आवेदक मिलना मुश्किल लग रहा है। इसकी वजह है प्रदेश के कालेजों में लागू सेमेस्टर पैटर्न और परीक्षा के आयोजन में देरी। परीक्षा का कोई माहौल न देख बीएससी पास करने वाले अधिकांश छात्र एमएससी में प्रवेश ले चुके हैं। डिप्लोमा में अच्छे अंक वाले नौकरी की तलाश में हैं तो आगे पढ़ाई के लिए भी छात्र प्रवेश ले चुके हैं। व्यापमं ने लेटरल एंट्री के लिए फार्म भरने की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर रखी है(दैनिक जागरण,भोपाल,9.10.2010)।

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