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09 अक्टूबर 2010

बिहारःरीडरों का यूजीसी वेतन वापिस नहीं होगा

विश्र्वविद्यालयों के रीडरों को दिया गया यूजीसी वेतनमान वापस नहीं होगा और जिन्हें यूजीसी का वेतनमान नहीं दिया गया है उन्हें एक पखवारे के भीतर देना होगा। यह आदेश न्यायाधीश नव नीति प्रसाद सिंह की पीठ ने शुक्रवार को मगध विश्र्वविद्यालय के कामर्स कालेज के शिक्षक कामेश्र्वर प्रसाद सिंह व अन्य के मामले में दायर याचिका पर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि आदेश सभी विश्र्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए लागू होगा। किसी भी शिक्षक को आदेश पाने के लिए अलग से हाईकोर्ट में केस फाइल नहीं करना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा जिन शिक्षकों को यूजीसी का वेतनमान न मिले तो वे सीधे हाईकोर्ट में अवमानना का केस दर्ज कर सकते है। कोर्ट के इस आदेश से 1000 रीडरों को लाभ मिलेगा। मालूम हो कि विश्र्वविद्यालयों के रीडरों को 1.1.1996 से यूजीसी का पुनरीक्षित वेतनमान 14,940 रुपया कर दिया गया जिसे मानव संसाधन विकास विभाग ने 2005 से लागू कर दिया गया। बाद में मानव संसाधन विकास विभाग ने अपने आदेश को वापस कर लिया। परिणामस्वरूप इनका वेतनमान घटाकर 13,260 कर दिया। राज्य सरकार के इस आदेश से बड़ी संख्या में रीडर प्रभावित हो गये। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह हो गयी कि बढ़ायी गई रकम को बंद ही नहीं किया गया बल्कि जिसने वेतनवृद्धि का लाभ लिया गया था। उसे वापस कराने को फरमान जारी किया गया। इस हिसाब से प्रति रीडर 4 लाख से लेकर 5 लाख रूपये की रिकवरी किया जाने लगा। अदालत ने मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी किये गये रिकवरी आदेश को ही निरस्त कर दिया(दैनिक जागरण,पटना,9.10.2010)।

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