गौतम बुद्घ प्राविधिक विश्वविद्यालय ने बीटेक में ब्रांच परिवर्तन के नियमों में बदलाव किए हैं। नए नियमों से कॉलेजों को अवगत कराने के लिए समस्त संस्थाओं के प्राचार्य और निदेशकों को जीबीटीयू कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक ने पत्र भी भेज दिए हैं। कॉलेजों को २५ अक्टूबर तक नए नियमों के अनुरूप ब्रांच परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी कर विश्वविद्यालय को ब्यौरा भेजने को कहा गया है।
जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों हुई जीबीटीयू की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में बीटेक छात्रों के ब्रांच परिवर्तनों के नियमों पर सहमति बनी थी। इसके लिए बीटेक आर्डिनेन्स के बिन्दु ६ में परिर्वतन किया गया है। बीटेक फर्स्ट ईयर में प्रवेश लेने वाले छात्रों की ब्रांच में बदलाव एडमिशन की अंतिम तिथि के दस दिन के भीतर हो सकेगी। इसके लिए प्रवेश परीक्षा की कंबाइड जनरल रैंक ही एकमात्र आधार होगा। सेकंड ईयर के थर्ड सेमेस्टर में भी ब्रांच बदलने के मानक बदले गए हैं। नियमों के तहत संबंधित ब्रांच में फर्स्ट ईयर में हुए प्रवेश के २५ फीसदी छात्रों का ही ब्रांच ट्रांसफर हो सकेगा। इसका आधार मेरिट होगी। ट्रांसफर के बाद छात्रों की संख्या कुछ प्रवेश की ७५ फीसदी से कम नहीं हो सकेगी। यहां कॉलेजों को राहत यह मिली है कि पहले ब्रांच ट्रांसफर के बाद कुल संख्या एआईसीटीई द्वारा निर्धारित सीट के ७५ फीसदी से कम नहीं होनी चाहिए थी अब इसे घटाकर ५० फीसदी कर दी है। इसका फायदा उन कॉलेजों के छात्रों को ब्रांच बदलने में मिल सकेगा, जहां सीटें खाली रह जाती हैं। पहले जिन कॉलेजों में सीट के ७०-७५ फीसदी ही प्रवेश होते थे उनके छात्र थर्ड सेमेस्टर में अपना ब्रांच नहीं बदल सकते थे। ब्रांच परिवर्तन की प्रक्रिया फर्स्ट ईयर का रिजल्ट घोषित होने के दस दिनों के भीतर ही पूरी करनी होगी। बीटेक बॉयोटेक्नोलॉजी के छात्र ब्रांच नहीं बदल सकेंगे। पहले यह व्यवस्था बीटेक एग्रीकल्चर और सीधे सेकंड ईयर में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए ही थी। सूत्रों के अनुसार, दूसरे वर्ष में १० हजार रुपए फीस लेकर ब्रांच परिवर्तन का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया था, जिस पर सहमति नहीं बनी थी। सदस्यों का मानना था कि इससे निजी स्कूलों में एक नई फीस वसूली शुरू हो जाएगी। कॉलेजों में ब्रांच परिवर्तन की प्रक्रिया के लिए सीधे निदेशक और प्राचार्य को ही जिम्मेदार बनाया गया है। यह हिदायत भी दी गई है कि दिशा-निर्देशों को उल्लंघन किए जाने पर किसी भी दशा में संबंधित छात्र या कॉलेज को कोई भी राहत नहीं दी जाएगी(अमर उजाला,लखनऊ,11.10.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।