शिक्षा बोर्ड धर्मशाला में हुए नकली सर्टिफिकेट के फर्जीवाड़े का मामला शांत नहीं हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश विश्वविद्यालय में बीए सेकेंड ईयर की फर्जी मार्कशीट का मामला प्रकाश में आया है। अब सवाल उठता है कि यदि छात्रा बीए सेकेंड में फेल थी तो यह मार्कशीट आखिर कहां से आई। मार्च 2008 में ली गई परीक्षा में छात्रा का रिजल्ट फेल है, तो फर्जी मार्कशीट कहां से बनी और फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले शख्स पर सीआईडी और विवि प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ी। प्रदेश विश्वविद्यालय में तैनात सीआईडी और विवि प्रशासन को इस बात की जानकारी पहले क्यों नहीं लगी। विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अमरनाथ गुप्ता का कहना है सोमवार को फर्जी मार्कशीट को पूरी तरह से जांचा जाएगा। उनका कहना है कि यदि मार्कशीट फर्जी पाई जाती है तो पुलिस में मामला दर्ज किया जाएगा। परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि छात्रा के पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे।
फर्जी है मार्कशीट : एसएफआई
विवि कैंपस में सक्रिय छात्र संगठन एसएफआई का कहना है कि उक्त छात्रा की मार्कशीट पूरी तरह से फर्जी है। एसएफआई के कैंपस अध्यक्ष मुनीश शर्मा का कहना है कि विवि प्रशासन इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यदि छात्रा बीए सेकेंड ईयर में फेल थी तो उसके पास असली मार्कशीट कहां से आई। मुनीश शर्मा का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
निष्पक्ष जांच करें प्रशासन : एबीवीपी
एबीवीपी की विवि कैंपस इकाई ने भी फर्जी सर्टिफिकेट मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इकाई अध्यक्ष आशीष सिक्टा का कहना है कि फर्जी सर्टिफिकेट मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए(दैनिक जागरण संवाददाता,शिमला,16.10.2010)।
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