शिक्षा विभाग ने एक ही साल में दूसरी बार लेक्चरर की वरिष्ठता सूची जारी कर विवाद पैदा कर दिया, जबकि यह मामला अभी कोर्ट के विचाराधीन है। नई सूची निकाले जाने से 40 फीसदी प्रिंसिपल फिर से लेक्चरर पद पर वापस पहुंच गए। इसे लेकर गजटेड एजुकेशनल स्कूल सर्विसेज एसोसिएशन ने संघर्ष की चेतावनी दी। स्कूल शिक्षा महानिदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी दविंदर सिंह ने कहा कि इसके संबंध में यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वे डीजीएसई (डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन) कार्यालय में दर्ज करवा सकते हैं जिस पर विचार किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेशभर में लेक्चरर अपनी तरक्की को लेकर बीते आठ सालों से संघर्ष कर रहे हैं। इसे लेकर प्रदेश स्तर पर लेक्चररों द्वारा अपने प्रतिनिधियों के साथ मिलकर करीब 30 बैठकें की जा चुकी हैं। शिक्षकों के इस संघर्ष को देखते हुए ही गत फरवरी में शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने लेक्चररों की वरिष्ठता सूची जारी की थी। फरवरी में इसके आधार पर 719 लेक्चररों को तरक्की देकर प्रिंसिपल बना दिया गया था। कुछ लोग इसके खिलाफ हाईकोर्ट में चले गए थे। यह मामला अभी तक कोर्ट में विचाराधीन है। अभी इस मामले में कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया था कि डीजीएसई कृष्ण कुमार ने पहली अक्टूबर को लेक्चररों की नई वरिष्ठता सूची जारी कर सीनियरों को जूनियर व जूनियरों को सीनियर बनाकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया। नई सूची के मुताबिक 40 फीसदी प्रिंसिपल फिर से लेक्चरर पद पर वापस भेज दिए गए। इस बारे में गजटिड एजूकेशन स्कूल सर्विसिज एसोसिएशन के प्रधान सरबजीत सिंह तूर सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि शिक्षा विभाग द्वारा फरवरी में लेक्चररों की जो वरिष्ठता सूची जारी की थी, वह जंजुआ आयोग एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार थी। उधर, सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग ने अनुसूचित जाति के लेक्चररों को लाभ पहुंचाने के लिए ही नई सूची जारी की है। यही कारण है कि लेक्चररों की नई पदोन्नति सूची में ज्यादातर उम्मीदवार अनुसूचित जाति से संबंधित हैं(दैनिक जागरण,जालंधर,11.10.2010)।
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