सीआईसी ने स्वास्थ्य मंत्रालय से कहा है कि एम्स और उस जैसे अन्य संस्थानों की परीक्षा में शामिल होने के लिए पात्रता निर्धारित करने की समय सीमा तय करे। यह पात्रता निर्धारण भारतीय मूल के लोगों और प्रवासी भारतीयों के लिए किया जाना है। सूचना के अधिकार के तहत तारक अवसरला नाम के एक व्यक्ति ने प्रवासी मामलों के मंत्रालय से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और अन्य संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के लिए भारतीय मूल के लोगों की अर्हता के बारे में जानकारी मांगी थी। अवसरला ने अगस्त 2009 में ही यह आवेदन दिया था लेकिन एक साल बाद भी मंत्रालय ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया। मंत्रालय ने कहा कि उनकी तरफ से अर्हता की शर्तो को अंतिम रूप दे दिया गया था लेकिन एम्स और अन्य मेडिकल संस्थानों की नियंत्रक संस्था स्वास्थ्य मंत्रालय से अंतिम जवाब नहीं मिला। अवसरला ने सीआईसी को शिकायत की कि उन्हें मंत्रालय ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया और स्वास्थ्य मंत्रालय से भी जानकारी लेने का उनका प्रयास बेकार गया। उन्होंने दावा किया कि सूचना के अभाव में उनकी बेटी को नुकसान उठाना पड़ा। सूचना आयुक्त दीपक संधू ने कहा, स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश दिया जाता है कि वह आवेदक को पूरा जवाब दो हफ्ते में दे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आवेदक को तीन सालों में भी संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।(दैनिक जागरण,दिल्ली,11.10.2010)।
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