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10 अक्टूबर 2010

आईआईटी कानपुर के शोध पत्र में नकल से सनसनी

आईआईटी के प्रोफेसर व उनके सहायकों पर शोध पत्र में नकल के आरोप से संस्थान में सनसनी है। इस घटना से आईआईटी प्रशासन सकते में है। साख पर आंच न आये, इसके लिए संस्थान प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी है। देश एवं प्रदेश के विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। साथ ही दो नवंबर तक संस्थान प्रशासन चेयरमैन बोर्ड ऑफ गर्वनर को रिपोर्ट देगा। आईआईटी के अधिकारी ने बताया कि बायो साइंसेज एंड बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार एवं उनके सहायकों पर आरोप है कि दो रिव्यू आर्टिकल लिखे, जो इंटरनेशनल जर्नल में छप चुके थे। उन शोध पत्रों में कुछ अंश उनका नहीं है जिस पर एलसेवियर प्रकाशन ने प्रकाशित लेख वापस भी ले लिये और प्रोफेसर व सहायकों पर नकल के आरोप भी जड़ दिये। बताया गया कि प्रो. अशोक कुमार, रुचि मिश्रा एवं सीमा रानी जैन के शोध पत्र माइक्रोबिअल प्रोडक्शन ऑफ डिहाइड्रोक्सयासीटोन में कुछ अंश विकीपीडिया और स्टेटमास्टर.कॉम से लिए गये। इसी प्रकार राधा गुप्ता एवं अशोक कुमार के लेख मॉलिक्यूलर, इंप्रिंटिंग इन सोल-जेल मैट्रिक्स में भी यही आरोप लगे। बताया गया कि जैसे ही इस मामले पर प्रकाशन और प्रोफेसर के बीच वार्तालाप शुरू हुआ तो प्रोफेसर ने अपना लेख वापस लेने की बात भी प्रकाशक से कही थी। उधर प्रकाशक ने प्रकाशित जर्नल से दोनों रिव्यू आर्टिकल वापस ले लिये। प्लेगेरिज्म के आरोप को संस्थान प्रशासन ने गंभीरता से लिया। वरिष्ठ प्रोफेसर अश्विनी कुमार के निर्देशन में प्रोफेसर कल्याणमय देव एवं प्रोफेसर सोमनाथ विश्वास की कमेटी बना दी गयी है। इस बाबत आईआईटी के निदेशक प्रो. संजय गोविंद धांडे ने बताया कि मामला गंभीर है। प्लेगेरिज्म का इतना बड़ा मामला पहली बार सामने आया है। विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। कमेटी से जल्द रिपोर्ट मांगी गयी है। यह रिपोर्ट दो नवंबर को संस्थान के चेयरमैन बोर्ड ऑफ गर्वनर को सौंपी जायेगी(दैनिक जागरण,कानपुर,10.10.2010।

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