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10 अक्टूबर 2010

उत्तराखंडःफार्मासिस्टों की हड़ताल वापस

फार्मेसिस्टों ने समझौता मसौदे में चार सूत्रीय मांगों पर तय समय पर कार्रवाई का आश्वासन शामिल किए जाने के बाद शनिवार शाम प्रदेशव्यापी हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी। संघ के रविवार से कार्य पर लौटने के फैसले से विभाग ने राहत की सांस ली है। अब अस्पतालों में दवा वितरण का कार्य सुचारू होगा। वेतन विसंगति, प्रमोशन और सेवा नियमावली में अनियमितताओं को लेकर सूबे के फार्मेसिस्ट सोमवार से हड़ताल पर थे। हालांकि, शासन व महानिदेशालय ने शुरू में ही हड़ताल समाप्त कराने की कोशिश की पर उनके प्रस्ताव को फार्मेसिस्टों ने सिरे से नकार दिया। बीती बुधवार को हड़ताल पर एस्मा लगाने के साथ फार्मेसिस्टों व शासन के बीच तल्खी बढ़ गई। बावजूद इसके समाधान की कोशिशें दोनों तरफ से जारी रहीं। बीते रोज दोनों पक्षों में वार्ता में कई बिंदुओं पर सहमति तो बनी, लेकिन इस संबंध में शासनादेश जारी किए बगैर फार्मेसिस्ट हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हुए। शनिवार को शासन की उच्चस्तरीय बैठक में समझौते के मसौदे में शासनादेश की समय सीमा तय करने पर सहमति बनी। शासन के इस आश्र्वासन को फार्मेसिस्टों ने मान लिया। इसके बाद आंदोलनकारी संगठन ने हड़ताल समाप्ति की घोषणा की। स्वास्थ्य सचिव डा. उमाकांत पंवार के मुताबिक फार्मेसिस्टों के 50 से ज्यादा पदों के सृजन, उपकेंद्रों में तैनात फार्मेसिस्टों का पीएचसी, सीएचसी व अस्पतालों में स्थानांतरण और उपकेंद्रों के फार्मेसिस्टों को आठ सौ रुपये सफाई भत्ता देने का शासनादेश एक सप्ताह के भीतर जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि फार्मेसिस्टों को केंद्र के समान ग्रेड पे देने और सीनियरों को उच्चतर वेतन के मामले में 30 नवंबर तक अंतिम निर्णय लिया जाएगा। डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड के मुख्य प्रवक्ता एसएस चौहान ने बताया कि रविवार से सभी फार्मासिस्ट काम पर लौटेंगे। स्वास्थ्य महानिदेशक डा.एचसी भट्ट ने बताया कि हड़ताली फार्मेसिस्टों के खिलाफ किसी तरह की उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं की जाएगी। हड़ताल के दौरान संविदा पर नियुक्ति किए फार्मेसिस्टों की सेवाएं समाप्त की जाएंगी(दैनिक जागरण,देहरादून,10.10.2010)।

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