छात्रवृत्ति को ठिकाने लगाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की एक ऐसी कारगुजारी सामने आई है, जिससे सच्चाई भी शरमा जाए। दो साल पहले तत्कालीन डीएम और सीडीओ द्वारा जिन स्कूलों को फर्जी घोषित कर उनसे रिकवरी की गई थी, इनमें से 67 स्कूलों को फिर से 'बरी' कर दिया गया है। इनके खाते खोलकर बाकायदा समाज कल्याण विभाग को छात्रवृत्ति देने के आदेश भेज दिए गए हैं। इसकी अनुमति लेना तो दूर उच्चाधिकारियों को प्रकरण की भनक तक नहीं लगने दी गई है।
जुलाई 2008 में तत्कालीन सीडीओ और डीएम द्वारा कराई गई जांच में जिले में 300 फर्जी स्कूल मिले थे। इन सभी स्कूलों के खाते सीज कर एक करोड़ रुपए से अधिक की रिकवरी भी की गई थी। मामला तभी से जिला प्रशासन स्तर से लंबित है। इसके बाद कई अधिकारियों का स्थानांतरण भी हो गया। उधर, बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी स्कूलों को फिर से हरी झंडी देने का खेल अधिकारियों के संज्ञान में लिए बिना चलता रहा। बीएसए सत्येंद्र कुमार ने सीडीओ राजकुमार श्रीवास्तव और जिलाधिकारी अमृत अभिजात से किसी भी जांच की अनुमति नहीं ली। नगर शिक्षा अधिकारी व सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारियों की निरीक्षण आख्या को आधार बनाकर इनमें से 67 स्कूलों के खाते पुन: खोलने के आदेश कर दिए। यही नहीं, इसकी सूची समाज कल्याण विभाग में भेज दी, जिससे कि खातों में फिर से छात्रवृत्ति पहुंच सके।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि अधिकांश स्कूल अभी तक धरातल पर नहीं हैं, मगर विभागीय अधिकारियों द्वारा स्कूल संचालकों से स्कूल संचालित होने के शपथ पत्र ले लिए गए हैं। इस कार्रवाई में हर स्कूल से मोटी रकम भी वसूली गई है(दैनिक जागरण संवाददाता,आगरा,15.10.2010)।
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