एजी द्वितीय की ओर से कर्मचारियों का दमन, उत्पीड़न, अधिकारों का दुरुपयोग, नियमों और व्यवस्थाओं की अवहेलना करने के चलते केंद्रीय कर्मियों में उबाल आ रहा है। केंद्रीय कर्मचारी संघ समन्वय समिति ने उनकी इस प्रवृत्ति की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। समिति के अध्यक्ष टीपी मिश्र एवं चीफ कोआर्डिनेटर कृपाशंकर श्रीवास्तव ने एजी द्वितीय के मान्यता प्राप्त संघों के पदाधिकारियों के साथ वार्ता नहीं करने पर आश्चर्य जताया और कहा कि संघ के पदाधिकारियों को अपमानित करने को वह अपनी शान समझते हैं। विगत सात सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का हवाला देते हुए नेताद्वय ने कहा कि इसमें एजी लेखा के सभी कर्मचारी शामिल हुए। लेकिन एजी द्वितीय इन कर्मचारियों के खिलाफ बदले की कार्रवाई करने लगे। कर्मचारियों को डरा-धमकाकर बयान लिखाने और मॉफी मांगने जैसा अलोकतांत्रिक आचरण अपना लिया। कहा कि हड़ताल के संदर्भ में केंद्र सरकार और विभागाध्यक्षों को यथाविधि नोटिसें पहले ही दी गई थीं और सरकार ने भी इसे अवैघ घोषित नहीं किया था। ऐसे में नो वर्क नो पे के अलावा अन्य किसी कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं है। एफआर-17 ए तो कदापि लागू नहीं हो सकता। हड़ताल के दिन सभी ने देखा कि गेट खुला था और पुलिस लगी थी। किसी के साथ कोई जोर जबर्दस्ती नहीं की गई। इस दिन लगभग सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इंप्लाइज एंड वर्कर्स फेडरेशनों और ऑल इंडिया ऑडिट एंड एकाउंट्स कर्मचारी संघ के संयुक्त आह्वान पर पूरे देश में व्यापक हड़ताल हुई। हड़ताल में करोड़ों कर्मचारी और मजदूर शामिल रहे लेकिन उत्पीड़नात्मक कार्रवाई केवल एजी यूपी लेखा में शुरू की गई। एजी द्वितीय की हठधर्मिता से कर्मियों में हड़कंप की स्थिति और आतंक का माहौल बन गया है। नेताद्वय ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई और अमर्यादित व्यवहार बंद नहीं हुआ तो समिति तीव्र आंदोलन चलाने को विवश होगी(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,9.10.2010)।
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