अनेक कुलपति प्रशासकीय चुनौतियों से निपटने में अपने को कमजोर पाते हैं। सरकार को उन्हें पेशेवर दक्षता हासिल करने में मदद करनी चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की एक नई पहल यदि सफल होती है तो बहुत संभव है कि देश के विश्वविद्यालयों में दिख रही प्रशासकीय गुणवत्ता में सुधार दिखने लगे। आयोग ने यह सुझाव दिया है कि कुलपतियों को विश्वविद्यालय चलाने का अच्छा अनुभव नहीं होता है और चूंकि प्रशासकीय व्यवस्थाओं से उनका कम वास्ता पड़ता है इसलिए उन्हें अलग से प्रशिक्षण दिया जाए।
आयोग की विशेषज्ञ समिति का मानना है कि कुलपति, रजिस्ट्रार या कॉलेज के प्राचार्य साधारणत: शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आते हैं और पढ़ना-पढ़ाना और शोध आदि उनके मुख्य कार्य होते हैं, परंतु जब वे विश्वविद्यालय के प्रमुख बनते हैं तो प्रशासकीय गुर, वित्त प्रबंधन आदि में पारंगत नहीं होने से उन्हें कठिनाइयांे का सामना करना पड़ता है। आयोग की समिति ने इसलिए यह सुझाव दिया है कि विश्वविद्यालयों के प्रमुखों को मैनेजमेंट कोर्सेस के जरिए प्रशासकीय अधिकारी बनवाया जाए।
आज देश में 150 के लगभग विश्वविद्यालय और अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान हैं जहां 5 लाख से अधिक शिक्षक और शिक्षा से जुड़े प्रशासकीय अधिकारी पदों पर हैं। यह संख्या अलगे 10 वर्षो में दोगुनी होनी है। विश्वविद्यालयों के हालात आज ठीक तो कतई नहीं हैं।
आए दिन छात्र हंगामा करते हैं, कर्मचारी नित नई मांगों को लेकर हड़ताल करते हैं और काम रोकते हैं। कुलपति बनने के पहले वे कहीं न कहीं पढ़ाने के कार्य में लगे रहते हैं और नई जवाबदारी में प्रशासकीय काम अधिक करने पड़ते हैं।
यदि आयोग की इन सिफारिशों को सरकार मानती है तो देश के बड़े शिक्षा संस्थानों में पेशेवर कार्यप्रणाली की बेहतर शुरुआत होगी। हालांकि देश के कई विश्वविद्यालयों में कई वर्षो पूर्व ऐसे प्रयोग किए थे, जिसके तहत सेवानिवृत्त आईएएस और आईपीएस अफसरों को कुलपति बनाया गया था। इस प्रयोग के नतीजे बहुत अच्छे भले ही न आए हों, परंतु कैंपस में अनुशासन के वातावरण में सुधार अवश्य हुआ था।
अब नया विचार आयोग के जरिए सामने आया है। देश में उच्च शिक्षा का वातावरण वैसे ही चिंताजनक है। नई-नई नीतियां, बदलती वैश्विक परिस्थितियां, शिक्षा के बदलते परिमाण और विभिन्न चुनौतियों के चलते विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा संस्थान चलाना काफी दुष्कर कार्य है। अनेक कुलपति प्रशासकीय चुनौतियों से निपटने में स्वयं को कमजोर पाते हैं। सरकार को चाहिए कि नई परिस्थितियों से निपटने के लिए कुलपतियों को पेशेवर व प्रशासकीय दक्षता हासिल करने में मदद करे(संपादकीय,दैनिक भास्कर,दिल्ली,2.10.2010)।
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