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01 अक्टूबर 2010

राजस्थान: सवा सौ कृषि मंडी बोर्डों पर लटकी तलवार

राजस्थान की 124 कृषि उपज मंडी समितियों के बोर्ड पर कानूनी तलवार लटक गई है।

राज्य कृषि विपणी अधिनियम के एक प्रावधान के चलते बोर्ड में निर्वाचित होकर आए किसान प्रतिनिधि, पार्षद आदि कार्यकाल पूरा करने से पहले ही अयोग्य हो गए हैं। अब वे न तो बोर्ड की बैठकों में भाग ले सकते हैं और न ही बोर्ड में कोई निर्णय कर सकते हैं। इन हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने इनका कार्यकाल पूरा करवाने के लिए कानून में संशोधन करने का मानस बना लिया है। कृषि विपणन निदेशालय के सूत्रों के अनुसार इस बारे में विधिक राय लेकर राज्य सरकार को मामला भिजवाया गया है। चूंकि यह राजनीतिक भी है, इसलिए सरकार ही अंतिम निर्णय करेगी।

अयोग्यता का कारण
अधिनियम की धारा 7 (5) में यह प्रावधान है कि उप धारा (1) के अधीन निर्वाचित सदस्य उक्त सदस्य की हैसियत से पदधारण समाप्त कर देगा यदि उसको निर्वाचित करने वाला निर्वाचक मंडल (इलेक्ट्रोल) सदस्य नहीं रहा है। यानी मंडी समिति सदस्य को चुनने वाले वोटर यदि अपने पदों पर नहीं रहे हैं तो मंडी समिति सदस्य स्वत: ही पद से हट जाएगा।

प्रत्येक अ और विशिष्ट श्रेणी में 8 और अन्य श्रेणी की मंडियों में 6 किसान प्रतिनिधि चुने जाते हैं। इनका चुनाव वार्ड पंच, सरपंच, जिला परिषद सदस्य करते हैं। चूंकि राज्य में पंचायतों के चुनाव हो गए हैं, इसलिए निर्वाचक मंडल पदों पर नहीं रहा तो ये मंडी समिति सदस्य भी अयोग्य हो गए। इसी तरह नगरपालिका से चुनकर आने वाला पार्षद प्रतिनिधि भी अयोग्य हो गया।

नियम कहता है
कृषि उपज विपणी नियम 1963 के नियम 28 में प्रावधान है कि मंडी समिति का कोई सदस्य पद से स्वत: ही हट जाएगा यदि वह उस निर्वाचन क्षेत्र का सदस्य न रहे, अथवा उन व्यक्तियों में से कोई एक न रहे जिसने उसका निर्वाचन किया था। ऐसा सदस्य अपने आप भविष्य में मंडी समिति की बैठकों में उपस्थित होना बंद कर देगा।


अध्यक्षों पर भी तलवार
कानूनन मंडी अध्यक्ष का पद किसान प्रतिनिधि के लिए आरक्षित है। चूंकि किसान प्रतिनिधि के मतदाता सरपंच, वार्ड पंच और जिला परिषद सदस्य ही होते हैं। जब वे पदों पर नहीं रहे तो वह किसान प्रतिनिधि भी स्वत: हट जाता है, जब सदस्य ही नहीं रहा तो वह अध्यक्ष भी नहीं रह सकता।


कार्यकाल पूरा करने पर अड़े प्रतिनिधि
मंडियों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का तर्क है कि पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें कैसे हटाया जा सकता है। यूं तो राज्यसभा सदस्य का चुनाव भी विधायक करते हैं। कई बार विधानसभा भंग हो जाती है अथवा नए चुनाव हो जाते हैं और वे विधायक भी पद पर नहीं रह जाते, लेकिन राज्यसभा सदस्य भी तो अपना कार्यकाल पूरा करते ही हैं।


कानून में संशोधन करेंगे
इस पेचीदगी को दूर करने के लिए हम नियमों और कानून में संशोधन करना चाहते हैं। बुधवार को हुई कैबिनेट में विभाग की ओर से प्रस्ताव भी लाया गया था, लेकिन उसे और विचार करने के लिए डेफर कर दिया। - गुरमीतसिंह कुन्नर, कृषि विपणन राज्यमंत्री


स्वविवेक से निर्णय हो
मंडी अधिनियम के मुताबिक निर्वाचित अथवा मनोनीत सदस्य को उसके पांच साल के कार्यकाल से पहले नहीं हटाया जाना चाहिए। यदि कानूनी खामी की वजह से अयोग्यता की स्थिति बनी है, तो सरकार स्वविवेक से निर्णय करे। - प्रभुलाल सैनी, पूर्व कृषि मंत्री(दैनिक भास्कर,जयपुर,1.10.2010)

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