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01 अक्टूबर 2010

हरियाणाःअतिथि अध्यापकों को सुप्रीम कोर्ट का झटका

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में जेबीटी भर्ती पर रोक लगाने संबंधी अतिथि अध्यापकों की याचिका को बृहस्पतिवार को खारिज कर उन्हें करारा झटका दिया है। अतिथि अध्यापकों ने प्रदेश सरकार द्वारा जेबीटी भर्ती के परिणाम को जारी करने को गलत बताते हुए नियुक्तियों पर रोक लगाने की माग की थी।
अतिथि अध्यापकों ने कहा था कि चयन आयोग ने 30 अगस्त को एक पब्लिक नोटिस जारी कर बीएड डिग्री के आधार पर जेबीटी पदों पर काम कर रहे अतिथि अध्यापकों को प्रक्रिया से बाहर कर दिया, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। अतिथि अध्यापकों के अधिवक्ता ने यह भी तर्क रखा कि अतिथि अध्यापक पिछले चार वर्षो से बीएड डिग्री के आधार पर जेबीटी पदों पर बतौर अतिथि अध्यापक नियुक्त है और शिक्षा विभाग द्वारा उन्हे अनुभव प्रमाणपत्र भी जारी किए गए है।
मामले पर सरकारी पक्ष की अनुपस्थिति में पात्र अध्यापकों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विश्वनाथन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने सिर्फ अतिथि अध्यापकों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने की छूट दी थी, न कि जेबीटी पद के लिए इसे जरुरी योग्यता में छूट दी थी। इसलिए चयन आयोग ने अदालत के आदेशो की कोई अवहेलना नहीं की है। कमीशन द्वारा जारी विज्ञापन में जेबीटी पद के लिए जरूरी योग्यता का स्पष्ट उल्लेख किया गया था और उसी के आधार पर भर्ती की गई है। उन्होंने अपना तर्क पेश करते हुए कहा कि बीएड डिग्रीधारी अतिथि अध्यापकों की जेबीटी पदों पर बतौर अतिथि अध्यापक नियुक्ति एक अस्थायी व्यवस्था थी। खंडपीठ ने इस पर सहमति जताते हुए अतिथि अध्यापकों की याचिका निरस्त कर दी व कहा कि अतिथि अध्यापक मामले को हाईकोर्ट में उठाने के लिए स्वतंत्र है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए पात्र अध्यापक संघ के निवर्तमान कानूनी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दलीप बिश्नोई ने कहा कि जेबीटी भर्ती की अंतिम अड़चन इस फैसले के साथ दूर हो गई है। अत: सरकार जल्द से जल्द नवचयनित अध्यापकों को उनकी गृहजिले में बीएड डिग्री के आधार पर लगे अतिथि अध्यापकों की जगह नियुक्तिया प्रदान करे(दैनिक जागरण,हिसार,1.10.2010)।

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