मध्यप्रदेश में हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बारे में 9 अक्टूबर,2010 को उच्च शिक्षा विभाग को निर्देशित कर दिया। अब तक महात्मा गांधी के नाम पर वर्धा, महाराष्ट्र में एक अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय चल रहा है।
मध्य प्रदेश सरकार को कोशिश करनी पड़ेगी कि सागर में इस प्रस्तावित हिंदी विश्वविद्यालय की दुर्गति वर्धा विश्वविद्यालय या माखन लाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय सरीखी न हो। मुख्यमंत्री द्वारा उच्च शिक्षा ऋण योजना की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में हिन्दी विश्वविद्यालय के गठन के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने आयुक्त उच्च शिक्षा से कहा कि इस बारे में सभी कार्रवाई शीघ्र पूरी करें। मुख्यमंत्री चौहान ने मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा ऋण गारंटी योजना को और अधिक व्यावहारिक और सरल बनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर रखी जाये। श्री चौहान ने कहा कि योजना पर कारगर अमल के लिए निरंतर समीक्षा के साथ ही व्यवहारिक दिक्कतों की पहचान कर उन्हें दूर किया जाये। मुख्यमंत्री ने योजना का सभी संभव माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार की जरूरत भी रेखाकित की। योजना के दायरे में शासकीय शिक्षण संस्थानों के साथ ही निजी सस्थानों के विद्यार्थियों को भी शामिल किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिए। उन्होंने विदेश में अध्ययन के लिए बैंक से ऋण लेने के इच्छुक मेधावी विद्यार्थियों को योजना का लाभ देने के लिए विदेशों के शिक्षण संस्थानों को चिन्हित करने को भी कहा।
मध्यप्रदेश के डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय में देश का अपनी तरह का पहला हिन्दी भाषा का लैब खोला जाएगा। यह जानकारी विश्वविद्यालय के लिए 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत मिलने वाले अनुदानों के लिए पेश किए गए प्रस्तावों की जांच के लिए सागर आए विश्वविद्यालय अनुदान विभाग की समिति के संयोजक व चंडीगढ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आर सी सोबती ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान दी। प्रो. साबती ने मध्यप्रदेश के पहले केन्द्रीय विश्वविद्यालय बनने वाले डा. हरिसिंह गौर विवि में इंस्टीटयूट आफ वूमेन स्टडीज व मानवाधिकार से जुडे पाठयक्रमों को शुरू किए जाने को आवश्यक बताया। उन्होंने विवि में लडकियों के लिए नए सर्व सुविधायुक्त छात्रावास, परिवहन की सुविधा व स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। दसवीं पंचवर्षीय योजना के तहत विश्वविद्यालय को मिले अनुदान की राशि के उपयोग को संतोषजनक बताते हुए यूजीसी समिति के साथ आए यूजीसी के ही उपसचिव एस जिलानी ने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत विश्वविद्यालय को सभी विभागों के लिए पर्याप्त अनुदान दिया जाएगा। जिलानी ने बताया कि यूजीसी ऐसी समिति देश भर के विश्वविद्यालयों में हर पांच साल में एक बार भेजता है, जिससे विश्वविद्यालय की विकासात्मक, बुनियादी ढांचे के विस्तार व शैक्षणिक गतिविधियों के सुधार से संबंधित प्रस्तावों की जांच कर अनुदान मुहैया कराया जा सके। गौरतलब है कि दो दिनों के दौरे पर 16 फरवरी को सागर आई यूजीसी की टीम ने डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के सभी विभागों व गैर शैक्षणिक संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान समिति के समक्ष विश्वविद्यालय के सभी विभागों की ओर से करीब 1148 करोड के प्रस्ताव पेश किए गए। समिति के ही अन्य सदस्य अमृतसर के गुरु नानक विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर आर.के. बेदी ने बताया कि सभी देशी व विदेशी भाषाओं के अध्ययन की सुविधा एक ही छत के नीचे मुहैया कराने के लिए सागर विश्वविद्यालय में स्कूल आफ लैंग्वेज स्थापित किए जाने का भी प्रस्ताव है।
डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी कलाओं के विभाग दृश्य एवं श्रव्य विभाग की उपलब्धियों को शानदार बताते हुए समिति के सदस्य व हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के प्रोफेसर के। मधुसूदन रेव्ी ने कहा कि इस विभाग के लिए बेहतर सुविधाएं दिलाने के लिए पर्याप्त राशि मुहैया कराई जाएगी। हिन्दी विश्वविद्यालय स्थापित करने के मध्यप्रदेश सरकार के निर्णय की देश के शीर्षस्थ विद्वानों ने मुक्त कंठ से सराहना की है। विश्वविद्यालय के स्वरूप के बारे में सुझाव देंने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा की अध्यक्षता में गठित विद्वानों एवं विशेषज्ञों की समिति की आज यहां सम्पन्न बैठक में एक मत से विश्वविद्यालय का गठन शीघ्र किये जाने का सुझाव दिया गया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि मातृभाषा में भारतीय जीवन दर्शन एवं मूल्यों को समाहित करते हुए उच्च शिक्षा का माडल प्रस्तुत करने के लिए हिन्दी विश्वविद्यालय की परिकल्पना की गई है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्य को प्राथमिकता पर लिया है। सरकार का प्रयास है कि विश्वविद्यालय का गठन जल्दी से जल्दी हो। विद्वानों के मार्गदर्शन एवं सुझाव को समाहित करते हुए विश्वविद्यालय गठन के अधिनियम बनाने की प्रक्रिया के लिए एक उप-समिति बनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि हिन्दी विश्वविद्यालय बनाना और प्रतिस्पर्धा के साथ गुणवत्तापूर्ण रोजगारमूलक शिक्षा दिलाना जोखिमभरा कदम माना जाता है, लेकिन राज्य सरकार इस जोखिम को लेते हुए पूरे देश में एक मानक के रूप में हिन्दी विश्वविद्यालय को स्थापित करेगी। हिन्दी भाषा में आज दवाओं का विवरण लिखा जा रहा है। हिन्दी भाषा के योग्य डॉक्टर, इंजीनियर की आवश्यकता है। शासन विश्वविद्यालय को पूरा संरक्षण प्रदान करेगा और यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय स्वायत्ता रहे। शासन का हस्तक्षेप नहीं हो। हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु सुझाव के लिये गठित समिति में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिन्दी के विशेषज्ञ और देश के शीर्षस्थ विद्वान रखे गये है। विद्वानों ने सुझाव दिया कि हिन्दी विश्वविद्यालय का पाठ्यक्रम मौलिक और भारतीय दर्शन के अनुरूप होना चाहिये। अधिकांश विद्वानों का मत था कि विश्वविद्यालय को सम्बध्दता की प्रक्रिया से मुक्त रखना चाहिये। हिन्दी विश्वविद्यालय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी, चिकित्सा, विधि, प्रबंधन, वाणिज्य एवं कला संकायों में अध्ययन एवं शोध का सुझाव विशेषज्ञों ने दिया। विश्वविद्यालय के विद्याथियों को रोजगार की सम्भावनाओं पर भी विचार किया गया। हिन्दी भाषा में पाठयक्रमों की रचना और पुस्तकों की उपलब्धता पर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये। शीघ्र ही उप-समिति गठित कर सुझावों के बारे में विचार किया जाएगा और शासन स्तर पर विश्वविद्यालय की स्थापना की प्रक्रिया को अन्जाम दिया जाएगा।
बैठक में समिति के विशेषज्ञ सदस्यों के साथ ही शासन के वरिष्ठ अधिकारियों प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री प्रभांशु कमल के साथ ही अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में वरिष्ठ पत्रकार श्री वेदप्रताप वैदिक, गांधी विद्या संस्थान वाराणसी की निदेशक डॉ. कुसुमलता केडिया, अजमेर के श्री मोहन लाल छीपा, वाराणसी के प्रो. रामचन्द्र सिंह, जयपुर के प्रो. मधुकर श्याम चतुर्वेदी, आगरा के प्रो. गिरीश सक्सेना, जबलपुर के प्रो. सी के शर्मा एवं श्री सुरेश्वर शर्मा, इलाहबाद के प्रो. गिरीश त्रिपाठी, जबलपुर के प्रो एडीएन वाजपेयी के साथ ही संस्कृत विश्वविद्यालय उज्जैन, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर और भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे(देव श्रीमाली,डेटलाईन इंडिया,भोपाल,9.10.2010 से आशोधित रूप में)।
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