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16 अक्टूबर 2010

यूपी में नेताओं की परीक्षा लेंगे पढ़े-लिखे लोग

उत्तर प्रदेश में अगले महीने पढ़े-लिखे लोग राजनीतिक दलों की परीक्षा लेकर उन्हें अपनी कसौटी पर कसेंगे। पढ़े-लिखों में डिग्री धारक, कॉलेजों, विवि के शिक्षक शामिल हैं। राजनीतिक हवा बनाने में इस जमात की अहम भूमिका तो होती ही, साथ उनका फैसला ऐसे समय आएगा जब प्रदेश में विस आम चुनाव में डेढ़ साल का समय रह गया है। राजनीतिक दलों के लिए परेशानी का सबब भी यही है। उत्तर प्रदेश में स्नातक एवं शिक्षक कोटे की पांच सीटों के लिए 38 जिलों में लगभग 6 लाख वोटर 10 नवंबर को मतदान करेंगे। पार्टियां इन चुनावों के दूरगामी नतीजों को लेकर फिक्रमंद हैं। वे फूंक-फूंक कर कदम उठा रहे हैं। मतदाताओं को रिछाने के लिए घोषणा पत्र तैयार हो रहे हैं, जिसमें उन मुद्दों को तरजीह मिलेगी जो पढ़े-लिखों को प्रभावित करते हैं। स्नातक कोटे की जो तीन सीटें हैं, उसमें बरेली-मुरादाबाद के साथ गोरखपुर-फैजाबाद व कानपुर सीट शामिल हैं। शिक्षक कोटे की दो सीटों में इलाहाबाद-झांसी और कानपुर हैं। यह चुनाव पार्टी के निशान पर नहीं होते हैं लेकिन राजनीतिक दल अपने अधिकृत प्रत्याशी घोषित करते हैं। भाजपा स्नातक कोटे की तीनों सीटों पर लड़ रही है। बरेली-मुरादाबाद की सीट पर वह गत कई चुनावों से जीत दर्ज करती आ रही है। विधान परिषद में भाजपा दल के नेता डा. नैपाल सिंह इसी सीट से एमएलसी हैं। शिक्षक कोटे की सीटों पर उसने अपने प्रत्याशी उतारने के बजाय समर्थन देने की बात कही है। समाजवादी पार्टी स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सपा ने पिछले चुनावों में भी शिक्षक कोटे की सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। कांग्रेस ने स्नातक कोटे की सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। शिक्षक सीटों के लिए उसकी तरफ से अभी कोई घोषणा नहीं हुई है। जहां तक बसपा की बात है, उसकी तरफ से अभी इन चुनावों को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है(नदीम,दैनिक जागरण,लखनऊ,16.10.2010)।

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