बीएड २०१०-११ की आॅनलाइन काउंसिलिंग से दाखिला लेने वाले स्व वित्तपौषित महाविद्यालयौं के एक लाख विद्यार्थियौं की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब इन सभी का पढ़ाई ठप हौने की न्बत आ गई है। इस आशय का अल्टीमेटम उत्तर प्रदेश स्व वित्तपौषित महाविद्यालय समन्वय समिति ने दिया है। समिति की ओर से लखनऊ विश्वविद्यालय से कहा गया है कि छात्रौं से जमा कराई गई महाविद्यालयौं की फीस १५ दिन में मुहैया कराई जाए। ऐसा न हौने पर शैक्षिक गतिविधियां बंद कर दी जाएंगी और विद्यार्थियौं का पंजीकरण या दाखिला निरस्त माना जाएगा।
प्रदेश के १४ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध बीएड महाविद्यालयौं की दाखिला प्रक्रिया पूरी हौ चुकी है। एक लाख से ज्यादा विद्यार्थी दाखिला ले चुके हैं। इन सभी की ३० हजार ३५९ रुपए फीस प्रवेश परीक्षा के आयौजक लखनऊ विश्वविद्यालय के खाते में जमा कराई गई है। करीब ३०० करौड़ रुपए फीस जमा हुई है। हर माह सवा करौड़ का ब्याज भी आ रहा है लेकिन अभी तक किसी महाविद्यालय की फीस वापस नहीं की गई है। इस कारण निजी बीएड महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मियौं कौ वेतन नहीं मिल पा रहा है। समन्वय समिति के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी और संयौजक डा. बृजेश भद्रिया ने बताया कि शैक्षिक सत्र २००९-१० शून्य कर दिया गया था। इस बार फीस नहीं मिल रही है। ऐसे में शिक्षक कर्मियौं का वेतन देने में दिक्कत आ रही है। फीस वापसी के मुद्दे पर लखनऊ विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से मुलाकात की गई। उनकी तरफ से ५० फीसदी फीस वापस करने की बात कही गई। उन्हौंने कहा कि यह बात महाविद्यालय संचालकौं कौ स्वीकार नहीं है। १००० बीएड महाविद्यालयौं के संचालक पूरी फीस वापस लेना चाहते हैं। उन्हौंने कहा कि आयौजक विश्वविद्यालय मनमानी पर आमादा है।
बैठक में बनी रणनीति
शनिवार कौ उत्तर प्रदेश स्व वित्तपौषित महाविद्यालय समन्वय समिति की बैठक भी हुई। इसमें फीस वापसी के लिए आंदौलन छेड़ने की रणनीति बनाई गई। कानपुर, मेरठ, आगरा, गौरखपुर सहित समस्त विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएड महाविद्यालयौं के संचालकौं ने कक्षाओं का संचालन ठप करने का फैसला किया है। मंगलवार कौ समन्वय समिति की विशेष बैठक बुलाई गई है। शैक्षिक सत्र २०११-१२ के शून्य हौने का खतरा भी है। बैठक फीस और आगामी सत्र के दाखिले के संबंध में रणनीति बनाई जाएगी(अमर उजाला,कानपुर,10.10.2010)।
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