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01 अक्टूबर 2010

आईएसबी मोहाली में सीटें आरक्षित नहीं

हैदराबाद के बाद मोहाली में बनने वाले दूसरे इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस को एक रुपए में 99 साल के लिए जमीन देने का मामला वीरवार को विधानसभा में जोरशोर से उठा।

मोहाली में बनने वाले देश के दूसरे इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) को मुफ्त जमीन देने संबंधी विधानसभा में उठे मामले पर सरकार ने स्पष्ट किया कि इस सिरमौर संस्था में पंजाब के लिए कोई कोटा आरक्षित नहीं किया जाएगा। इस स्तर की संस्थाओं को मुफ्त जमीन मुहैया कराना प्रदेश के लिए घाटे का सौदा नहीं है। कांग्रेसी विधायक बलबीर सिंह सिद्धू और दर्शन सिंह बराड़ के सवाल का जबाव देते हुए शिक्षा मंत्री डा. उपिंदरजीत कौर ने बताया कि इस संस्थान की बदौलत पंजाब एवं मोहाली विश्व मानचित्र पर आ जाएगा। हैदराबाद के बाद पंजाब के लिए यह गौरव की बात है कि देश की बड़ी कंपनियों ने संयुक्त रूप में ऐसा संस्थान स्थापित करने के लिए पंजाब को पहल दी है। फीस के संबंध में उन्होंने कहा कि संस्थान इसके लिए बैंकों से लोन की व्यवस्था भी कर रहा है। सिद्धू ने कहा कि इतनी महंगी जमीन एक निजी संस्था को मुफ्त में देने का पंजाब को क्या लाभ है, जबकि इसमें पढ़ने वाले छात्र की प्रतिवर्ष फीस 17.50 लाख रुपये रखी है, लेकिन पंजाब के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं रखी गई है। इस सवाल पर विपक्ष की नेता राजिंदर कौर भट्ठल ने संस्थान को पिछड़े इलाके की अनुपयोगी जमीन पर स्थापित करने का सुझाव दिया, लेकिन मुख्यमंत्री बादल ने खड़े होकर उनकी मांग को रद करते हुए कहा कि ऐसी जमीन पर कोई पढ़ने नहीं जाता और ऐसे संस्थान में पढ़ाने वाले विशेषज्ञ भी पिछड़े इलाकों में पढ़ाने के लिए तैयार नहीं हो सकते। एक रुपये पर जमीन देने के मामले में मुख्यमंत्री ने बताया कि बठिंडा और अमृतसर में यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए जमीन नि:शुल्क दी जा रही है। रोपड़ आईआईटी के लिए भी नि:शुल्क भूमि प्रदान की गई है।प्रश्न काल में कांग्रेस के विधायक दर्शन बराड़ ने यह मामला उठाते हुए कहा कि मोहाली की इतनी महंगी जमीन एक प्राइवेट संस्था को दे दी गई जबकि इस संस्थान ने प्रति विद्यार्थी एक साल की फीस 17.50 लाख रुपए रखी है। इसमें पंजाब के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं रखी गई है। इस सबके बावजूद सरकार ने विपक्ष की सीटें आरक्षित रखने की मांग को खारिज कर दिया। विपक्ष की नेता बीबी रजिंदर कौर भट्ठल ने संस्थान को पिछड़े इलाके में स्थापित करने का सुझाव दिया, जिसे सीएम ने नकार दिया।

उन्होंने बताया कि इस तरह के संस्थान में पढ़ाने वाले शिक्षा विशेषज्ञ पिछड़े इलाकों में पढ़ाने के लिए तैयार नहीं होते और यदि संस्थान को कामयाब करना है तो इसे मोहाली में ही स्थापित करना होगा। एक रुपए पर जमीन देने के मामले में मुख्यमंत्री ने बताया कि बठिंडा और अमृतसर में यूनिवर्सिटीज के लिए निःशुल्क जमीन दी जा रही है। आईआईटी रोपड़ के लिए भी मुफ्त जमीन दी गई है।

यह संस्थान मोहाली को विश्वपटल पर ला देगा। हैदराबाद का इंस्टीटच्यूट विश्व में 15वें स्थान पर है और यह पंजाब के लिए गर्व की बात है कि देश की दिग्गज कंपनियों की ओर से बनाया जाना वाला दूसरा संस्थान मोहाली में बन रहा है। अधिक फीस के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि संस्थान इसके लिए बैंकों से लोन की व्यवस्था भी कर रहा है। इसके अलावा संस्थान को होने वाला लाभ इसी इंस्टीटच्यूट में लगेगा।

डॉ. उपिंदरजीत कौर, शिक्षामंत्री

उधर, ग्रामीण क्षेत्र के अध्यापकों को मिले ज्यादा भत्ता मजीठा से अकाली विधायक बिक्रम सिंह मजीठिया ने मांग की कि सरकार को ग्रामीण सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर और बेहतर बनाने के लिए ऐसी नीति लानी चाहिए जिसके तहत अध्यापक शहरों के बजाये गांव में नियुक्ति को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि अब बिलकुल उल्ट है कि शहर में तैनात अध्यापक को 16 फीसदी अतिरिक्त भत्ता मिलता है। इसके कारण सभी अध्यापक शहरों की तरफ भागते हैं। इस सुझाव पर शिक्षा मंत्री डा. उपिंदरजीत कौर ने सहमति जताते हुए बताया कि उनकी सरकार पहले ही ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को नौकरी में पांच अंक का बोनस दे रही है, जबकि बड़े पैमाने पर रेशनेलाइज कर तीन हजार अध्यापकों को रिक्त स्कूलों में भेजा गया है। इसके अलावा नई भर्ती में ग्रामीण एवं दूर-दराज के क्षेत्रों में सेवा की शर्त भी लगाई गई है। मजीठिया के मूल सवाल पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि पंजाब में 2002 से 2007 तक कुल 29320 अध्यापक भर्ती किए थे, जबकि इस सरकार ने 2007 से लेकर अब तक 39713 अध्यापक भर्ती किए हैं और भर्ती प्रक्रिया जारी है। सुझाव था 1500 रुपये, वृद्धि मात्र 100 रुपये धूरी से निर्दलीय विधायक इकबाल सिंह झूंदा द्वारा पंजाब के चौंकीदारों का वेतन बढ़ाए जाने संबंधी सवाल पर राजस्व मंत्री अजीत सिंह कोहाड़ ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार ने चौंकीदारों द्वारा अदालत में दायर की हुई याचिका के फैसले के अनुसार उनका वेतन 700 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया है। उनके विभाग ने चौंकीदारों की मांग को गंभीरता से लेते हुए इसे प्रतिमाह 1500 करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन वित्त विभाग ने अदालत का हवाला देते हुए इसे केवल 100 रुपये बढ़ाने को स्वीकृति दी। झूंदा ने कहा कि पंजाब के सभी 10540 चौंकीदार केवल 23 रुपये प्रतिदिन दिहाड़ी पर काम कर रहे हैं, जो उनके साथ इंसाफ नहीं है। हरियाणा प्रति महीना 1500 रुपये दे रहा है। इस पर विपक्षी बैंचों से यह भी कहा गया कि अदालत ने प्रति महीना 100 रुपये बढ़ाने के साथ राज्य सरकार को यह नहीं कहा कि इसे और न बढ़ाया जाए।(दैनिक भास्कर,चंडीगढ़,1.10.2010)

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