कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करीब पांच करोड़ सदस्यों को भले ही एक फीसदी ज्यादा यानि 9.5 फीसदी ब्याज देने का फैसला हो गया हो लेकिन इसका फायदा नवंबर अंत के बाद ही मिल पाएगा। हालांकि इससे सभी सदस्यों को तो नुकसान नहीं होगा लेकिन अपने खाते से पैसा निकालकर बंद कराने वाले लाखों सदस्य जरूर ज्यादा ब्याज दर के लाभ से वंचित रहेंगे।
ईपीएफओ ने पिछले 15 सितंबर को केंद्रीय ट्रस्टी बोर्ड (सीबीटी) की बैठक में चालू वित्त वर्ष 2010-11 के लिए ब्याज दर एक फीसदी बढ़ाकर 9.5 फीसदी तय करने का फैसला किया था। यह भी दिलचस्प है कि सीबीटी की बैठक में कर्मचारियों के प्रतिनिधि के तौर पर सीबीटी सदस्य और हिंद मजदूर सभा के महासचिव ए. डी. नागपाल ने ईपीएफओ के वित्तीय आंकड़ों का गहन विश्लेषण करके बताया कि ईपीएफओ के सस्पेंस एकाउंट में 1731 करोड़ रुपये बकाया है।
जबकि ब्याज दर को 8.5 से बढ़ाकर 9.5 फीसदी करने के लिए 1600 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। नागपाल के इस तर्क पर ही सीबीटी के चेयरमैन और केंद्रीय श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे को ब्याज दर बढ़ाने की घोषणा करनी पड़ी। नागपाल का कहना है कि सीबीटी से फैसला होने के बाद इस प्रस्ताव को श्रम मंत्रालय के पास भेजा गया है।
श्रम मंत्रालय वित्तीय मंजूरी के साथ अधिसूचना जारी करवाने के लिए प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय के पास भेजेगा। आमतौर पर सीबीटी से फैसला होने के बाद करीब एक माह में संशोधित ब्याज दर लागू हो जाती है। लेकिन इस बार करीब ढाई माह का समय लगेगा। बिहार में चुनाव होने के कारण आचार संहिता लागू है। ऐसे में अधिसूचना 21 नवंबर को चुनाव संपन्न जारी होने के बाद ही जारी हो सकेगी। अधिसूचना जारी होने के बाद ही ईपीएफओ अपने सदस्य को बढ़ी ब्याज दर दे सकेगा। सामान्य तौर पर सदस्यों को कोई नुकसान नहीं होगा लेकिन नौकरी छोडऩे की वजह से अपना खाता बंद करवाकर पैसा निकालने वाले लाखों सदस्यों को जरूर इसका नुकसान होगा।
नागपाल ने माना कि इन सदस्यों को 21 नवंबर तक खाता बंद करवाने पर 8.5 फीसदी ही ब्याज मिलेगा। उन्होंने बताया कि नियमत: ईपीएफओ खाता बंद करवाने वाले सदस्यों को बाद में अतिरिक्त ब्याज का भुगतान करता है लेकिन यह रकम इतनी मामूली होती है कि खातों में ही पड़ी रह जाती है और ज्यादातर सदस्य निकाल नहीं पाते हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद खाता बंद करवाने वाले सदस्यों को 9.5 फीसदी ब्याज मिलने लगेगा(बिजनेस भास्कर,दिल्ली,16.10.2010)।
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