भारत सरकार ने इंदौर के दो कॉलेजों की मान्यता निरस्त कर दी है। आयुर्वेद की डिग्री दे रहे शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय और आचार्य ज्ञान आयुर्वेद महाविद्यालय को सत्र २०१०-११ में विद्यार्थियों के प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) की अनुशंसा के आधार पर सरकार ने यह फैसला लिया है।
सीसीआईएम ने उज्जैन के शासकीय धनवंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय को भी मान्यता प्रदान नहीं की है। इससे पहले ३० सितंबर को भारत सरकार का आयुष विभाग भी आचार्य ज्ञान आयुर्वेद महाविद्यालय और उज्जैन के धनवतंरि कॉलेज की मान्यता निरस्त करने का नोटिस जारी कर चुका है। आयुष विभाग ने आईएमसीसी एक्ट के सेक्शन १३ (सी) के अंतर्गत मान्यता निरस्त करने का फैसला लिया था।
अब एक ही कॉलेज : सत्र २०१०-११ में प्रवेश दे सकने वाले मान्य कॉलेजों की लिस्ट में इंदौर के अब एक ही आयुर्वेद कॉलेज का नाम बचा है। शुभदीप आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज को अंडर ग्रेजुएट स्तर की ५० सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी गई है। हालाँकि इस कॉलेज को भी सीसीआईएम ने हरी झंडी नहीं दी थी लेकिन आयुष विभाग की आपत्ति नहीं होने से सरकार ने नए सत्र के लिए कॉलेज को प्रवेश की अनुमति दे दी है। इसी तरह यूनानी चिकित्सा में डिग्री दे रहे अल फारुकी तैय्यबी कॉलेज और बुरहानपुर के यूनानी कॉलेज को भी नए सत्र के लिए मान्यता दे दी है। हालाँकि इन दोनों को भी रिकमेंड नहीं किया गया था।
नहीं था अस्पताल : २००१ में स्थापित आचार्य ज्ञान आयुर्वेद कॉलेज का नाम शुरू से ही विवादों से जुड़ा है। कॉलेज पर आरोप था कि वह गलत जानकारी देकर मान्यता हासिल कर रहा था। सीसीआईएम के निरीक्षण और दौरों के समय भी फर्जी मरीजों को ओपीडी में दिखाने की बात सामने आई थी। कॉलेज के लिए कम से कम ५० बिस्तर वाला अस्पताल और तमाम सुविधाएँ होना जरूरी है, लेकिन कॉलेज इन्हें सिर्फ कागजों पर दिखा रहा था(नई दुनिया,इन्दौर,2.10.2010)।
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