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02 अक्टूबर 2010

स्तरीय चिकित्सा शिक्षा के लिए विधेयक लाया जाएगा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की चिकित्सा व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए इस क्षेत्र पर होने वाले निवेश को बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का दो से तीन प्रतिशत तक करने की जरूरत बताई है। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा पर जोर देते हुए इसकी गुणवत्ता एवं प्रसार के लिए शीघ्र ही एक विधेयक लाने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के 38वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार चिकित्सा शिक्षा की मौजूदा प्रणाली की समीक्षा कर रही है। चिकित्सा शिक्षा की आज जो स्थिति है उसमें सुधार लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने मानव संसाधन राष्ट्रीय परिषद के गठन के लिए विधेयक का प्रारूप तैयार कर लिया है। इसे जल्द ही संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा संसाधनों का समान वितरण व इसकी गुणवत्ता जैसे पक्षों से कारगर ढंग से निपटा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के प्रारंभ तक चिकित्सा क्षेत्र में निवेश की दर एक प्रतिशत से भी कम थी, जिसमें अब तक 1.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र पर होने वाले खर्च को बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम दो से तीन प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है। एम्स को 2020 तक विश्व की सर्वश्रेष्ठ 10 मेडिकल यूनिवर्सिटी की जमात में खड़ा करने की इच्छा जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार इसमें कोई कसर नहीं छोड़ेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा कि एम्स की तर्ज पर देश के विभिन्न हिस्सों में बन रहे मेडिकल कॉलेज अगस्त, 2011 तक तैयार हो जाएंगे(दैनिक जागरण,दिल्ली,2.10.2010)।

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