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11 अक्टूबर 2010

छोटे शहर दे रहे हैं रोजगार के ढेरों अवसर

लंबे समय से देखा जा रहा है कि बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहर नौकरी करने वालों के अलावा कंपनियों के लिए भी लाभदायक सिद्ध हो रहे हैं। एसोसिएट चैंबर ऑफ कॉमर्स (एसोचैम) द्वारा किए गए ताजा अध्ययन के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल से ११ जून तक) के दौरान टीयर-२ शहरों में पुणे रोजगार की दृष्टि से सबसे आगे है। एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया कि कुल रोजगार में से पुणे की हिस्स्सेदारी १९.५ फीसदी है। इसके बाद लखनऊ और पांडिचेरी की हिस्सेदारी क्रमशः १४.३ फीसदी और १०.५ फीसदी है। एसोचैम द्वारा पेश किए गए "टीयर-२ और टीयर-३ शहर बने नए रोजगार के केंद्र" पर किए गए अध्ययन में कहा गया कि अप्रैल से जून २०११ के दौरान आईटी, आईटीईएस, बैंकिंग, शिक्षा और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में पुणे शीर्ष पांच रोजगार सृजित करने वाले शहरों में सबसे ऊपर रहेगा।

इन सभी पांच क्षेत्रों में लखनऊ ने इसी दौरान व्यापक रूप से रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। हालांकि, पांडिचेरी में एविएशन, बैंकिंग, एनर्जी, एफएमसीजी और हॉस्पिटेलिटी क्षेत्रों में असंख्य रोजगारों के अवसर देखने को मिल रहे हैं। एसोचैम के महासचिव डी.एस. रावत ने अध्ययन की रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि टीयर-३ शहरों में रांची रोजगार प्रदाताओं में शीर्ष पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल रोजगार अवसरों में रांची की हिस्सेदारी १६.८ फीसदी है। इसके बाद मंगलोर और मैसूर क्रमशः १२.६ फीसदी और ११.०८ फीसदी रोजगार देने वालों में दूसरे तथा तीसरे पायदान पर हैं। रांची में जिन शीर्ष पांच क्षेत्रों में रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर पैदा किए हैं, वे ऊर्जा, निर्माण, धातु, इलेक्ट्रॉनिक और टेलीकॉम हैं। वहीं, मंगलोर में इंजीनियरिंग, एनर्जी, बैंकिंग, इंश्योरेंस और एफएमसीजी में सबसे ज्यादा रोजगार पैदा हुए हैं। मैसूर ने ऑटोमोबाइल, इंश्योरेंस, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग और शिक्षा क्षेत्रों में नौकरियां के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

पुणे, सूरत और जयपुर समेत टीयर-२ शहरों में ज्यादातर रिक्तियां इंश्योरेंस कंपनियों, बैंकों, म्युचुअल फंड और ब्रोकर्ज कंपनियों में भरी गई हैं। मंगलोर, पांडिचेरी और औरंगाबाद समेत टीयर-३ शहरों में वित्तीय संबंधी नौकरियों के अवसर इन शहरों में दर्ज किए गए हैं। टीयर-२ और टीयर-३ शहरों में उम्मीदवारों के लिए वित्तीय सेवा क्षेत्रों ने सबसे ज्यादा रोजगार दिए हैं। इस क्षेत्र ने टीयर-२ और टीयर-३ शहरों में नौकरियों के अवसर क्रमशः १८.५ फीसदी तथा २१.५ फीसदी दर्ज किया गया है। दूसरा क्षेत्र जिसने इन उभरते हुए शहरों में रिक्तियों की भर्तियां की हैं वह है आईटी। आईटी क्षेत्र उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में रोजगार दिए हैं, जिसकी कुल हिस्सेदारी टीयर-२ शहरों में १७ फीसदी और टीयर-३ शहरों में १७.५ फीसदी है।

आईटी और आईटी संबंधी सेवाओं ने टीयर-२ शहरों में सबसे ज्यादा नौकरियां पुणे, सूरत, अहमदाबाद और नागपुर में मिल रही हैं। कम लागत वाले मंगलोर, जलंधर और औरंगाबाद टीयर-३ शहरों में आईटी कंपनियों के लिए पहली पसंद बने हुए हैं। इसके बाद टीयर-२ शहरों में शिक्षा क्षेत्र तीसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता बन गया है। स्कूलों और विश्वविद्यालयों में अध्यापकों और प्रोफेसरों की रिक्तियां बड़े पैमाने पर हो रही हैं। कुल रोजगार अवसरों में शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी ६.४१ फीसदी है। शिक्षा क्षेत्र के लिए टीयर-२ शहरों में से लखनऊ, पुणे और जयपुर सबसे ज्यादा पसंदीदा शहर हैं। शिक्षा के बाद कंसलटेंसी एवं रिसर्च क्षेत्र (४.९२ फीसदी) और प्रबंधन क्षेत्र (४.७० फीसदी) रोजगार देने के मामले में चौथे तथा पांचवें पायदान हैं। वहीं सबसे ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा करने वाले टीयर-३ शहर मैसूर के बाद रायपुर, उदयपुर और औरंगाबाद क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर हैं(आशुतोष वर्मा,नई दुनिया,दिल्ली,11.10.2010)।

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