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10 अक्टूबर 2010

उत्तराखंडःफर्जी आयुर्वेदिक डिग्री नहीं बनेगी कवच

देहरादून में अपनी दुकान चला रहे 68 झोलाछापों के खिलाफ अभियान में आयुर्वेदिक डॉक्टर भी शामिल होंगे। ताकि, आयुर्वेदिक डिग्रियों का हवाला देकर ये झोलाछाप बच न पाएं। झोलाछापों के खिलाफ अभियान चलाने से पूर्व डीएम को पत्र लिखकर स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में अवगत कराया है।

जनपद में नीम हकीम यानी झोलाछाप जान से खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे हैं। इनके इलाज से पीड़ितों की संख्या भी काफी है। खासतौर पर शहर के परिधि पर बसे हिस्सों और शहर की घनी बस्तियों में ये झोलाछाप इलाज कर रहे हैं, जिनके पास कोई डिग्री नहीं है। इस संबंध में अनेक शिकायतें मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले में ऐसे 68 झोलाछाप चिह्नित किये हैं। स्वास्थ्य विभाग इन झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है, लेकिन आयुर्वेदिक डिग्री की आड़ में ये झोलाछाप बच न निकलें, इसलिए इस बार अभियान में आयुर्वेदिक डॉक्टरों को भी ले जाने की तैयारी है।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.आरके पंत ने जिलाधिकारी को झोलाछापों की सूची उपलब्ध कराते हुए अभियान की आवश्यकता जताई है। उन्होंने डीएम से अभियान का समय निर्धारित करने और एसडीएम विकासनगर, मसूरी, चकराता, ऋषिकेश और सदर के साथ ही डिप्टी सीएमो प्रथम-द्वितीय व तृतीय को भी शामिल होने के लिए निर्देशित करने की मांग की है। जरूरत के अनुसार उन्होंने अभियान में आयुर्वेदिक डॉक्टरों की आवश्यकता भी जताई है(दैनिक जागरण संवाददाता,देहरादून,10.10.2010)।

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