बार काउंसिल ऑफ इण्डिया की वकालत पूर्व परीक्षा को लेकर चल रहा अदालती विवाद अभी थमा भी नहीं कि अब इस परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर नया बखेड़ा खड़ा हो गया है।
कुछ संस्थाओं और विद्यार्थियों ने परीक्षा के आयोजन में बीसीआई की साझेदार एजेंसी रेनमैकर के चयन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इनका कहना है कि बार काउंसिल ने इस एजेंसी को परीक्षा की जिम्मेदारी देने से पहले न तो कोई निविदा निकाली और ना ही अन्य एजेंसियों के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट' जारी किया गया। जबकि कई ऎसी ही संस्थाएं इसके लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। ऎसे में जाहिरा तौर पर बीसीआई ने पहले ही रेनमैकर से साझेदारी तय कर रखी थी। इधर, बार काउंसिल ऑफ इण्डिया ने खुद अभी तक इसको लेकर कोई सफाई नहीं दी है, लेकिन परीक्षा का विरोध करने वालों को एक और मुद्दा मिल गया है।
आरटीआई से हुआ खुलासा
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले का खुलासा बीसीआई की ओर से सूचना का अघिकार अघिनियम के तहत एक आवेदक को भेजे जवाब से हुआ है। दरअसल, एनएलयू नल्सार के पूर्व छात्र अनूप सुरेन्द्रनाथ ने बीसीआई से इस बारे में जानकारी मांगी थी। 'पत्रिका' के साथ ई-मेल के जरिए हुई बातचीत में भी अनूप ने बीसीआई के इस जवाब की पुष्टि भी की है।
उत्तर-पूर्व में भी विरोध
इधर, राजस्थान जैसे कुछ राज्यों की तरह उत्तर-पूर्व के करीब आधा दर्जन से अघिक राज्यों में भी वकालत पूर्व परीक्षा को लेकर विरोध शुरू हो गया है। असम, नागालैण्ड, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम, अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम की बार काउंसिल ने इस सम्बन्ध में सामूहिक प्रस्ताव पारित किया है। इन राज्यों ने बीसीआई को चिटी भी भेजी है(राजस्थान पत्रिका,जोधपुर,17.10.2010)।
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