राजकीय विटलनाथ सदाशिव पाठक आचार्य संस्कृत महाविद्यालय के प्रो.नागेन्द्र प्रतिहस्त को शुक्रवार को सेवा से बर्खास्त कर दिया। उन पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का आरोप था, जिसके सिद्ध होने के बाद शिक्षा विभाग के उपसचिव ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. विशम्भर दयाल जोशी ने बताया कि प्रतिहस्त ने पदोन्नति चाहने के लिए 1974 में अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। जिसे सहकर्मी गणपत लाल शर्मा ने उच्च न्यायालय जयपुर में चुनौती दी थी। शर्मा वर्तमान में राजकीय शास्त्री संस्कृत महाविद्यालय चौथ का बरवाड़ा में प्राचार्य हैं। अदालत के आदेश के बाद हुई जांच में प्रतिहस्त का अनुभव प्रमाण पत्र गलत पाया गया है। प्रतिहस्त की सेवानिवृत्ति में 8 माह शेष थे, वे मई 2011 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।
यह है मामला
नागेन्द्र प्रतिहस्त 1974 में अनुदानित संस्था संस्कृत महाविद्यालय कोटा में अध्यापन के लिए कोटा आए। तब द्वितीय श्रेणी अध्यापक के रूप में इन्हें सेवा में लिया गया। तब संस्कृत शिक्षा में टे्रण्ड ग्रेड दी जाती थी, जिस पर पदोन्नति अनुभव के आधार पर भी होती थी। इसके लिए प्रतिहस्त ने 1966 से 1973 तक वृन्दावन की एक निजी संस्था में प्राचार्य के रूप में कार्य का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिया, हालांकि इस प्रमाण पत्र को उस समय भी विभाग ने मानने से इनकार कर दिया था। 1999 में इस महाविद्यालय को राज्य सरकार ने मय स्टाफ अपने अधीन कर लिया। आचार्य कक्षाओं में अध्यापन को अनुभव मानते हुए इन्हें भी प्रोफेसर ग्रेड दे दी गई।
तब हुई जांच
प्रतिहस्त की पदोन्नति होने के कारण गणपत लाल शर्मा की वरिष्ठता प्रभावित हुई, तो शर्मा ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रमाण पत्रों की जांच की गई तो पाया गया कि जिस समय का नागेन्द्र प्रतिहस्त ने प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है, इस समय वे बिहार की एक संस्था में नियमित अध्ययन कर रहे थे। एक ही समय में दोनों कार्य संभव नहीं होने की स्थिति में उनके प्रमाण पत्र को फर्जी घोषित कर दिया गया(राजस्थान पत्रिका,कोटा,2.20.2010)।
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