छात्रों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति दर्ज कराने के सरकार के फरमान पर अमल करने से कई सरकारी डिग्री कालेज कन्नी काट रहे हैं। ऐसे कालेजों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। राजकीय डिग्री कालेजों में शिक्षकों व छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति जांचने को जारी शासन के आदेश कई कालेजों के लिए बेमानी हैं। उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने और कालेजों में छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति का आंकड़ा गिरने की सूचना से चिंतित सरकार ने यह कदम उठाया था। बीते माह के अंतिम हफ्ते में उच्च शिक्षा निदेशक को जारी आदेशों में कालेजों को हर दिन शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की नियमित उपस्थिति का ब्योरा देने को कहा गया। तकरीबन एक पखवाड़ा बीतने को है, लेकिन 69 राजकीय कालेजों में अधिकतर कालेजों ने शासन और उच्च शिक्षा निदेशालय को उक्त सूचना देने से गुरेज किया। कालेजों को यह जानकारी ई-मेल अथवा फैक्स के जरिए देनी है। दरअसल, स्कूलों में विद्यार्थियों की चहल-पहल खत्म होने के पीछे शिक्षकों की कम उपस्थिति को बड़ी वजह माना जा रहा है। सरकार कालेजों में विषयवार शिक्षकों की उपस्थिति का ब्योरा भी एकत्र कर रही है। उक्त सूचना के जरिए हर कालेज की सही तस्वीर उच्च शिक्षा महकमे के कंप्यूटरों व फाइलों में दर्ज होती, लिहाजा कालेज इस आदेश की नाफरमानी से गुरेज नहीं कर रहे। पखवाड़ेभर में कम संख्या में ही कालेजों ने नियमित ब्योरा देने की जहमत उठाई है। इससे खफा शासन ने कालेजों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला किया है। शासन के निर्देशों की जानकारी दूरदराज के कालेजों तक पहुंची, इस बारे में भी उच्च शिक्षा निदेशक से जानकारी मांगी जाएगी(दैनिक जागरम,देहरादून,15.10.2010)।
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