राजस्थान में भले ही हर गांव-ढाणी में स्कूल खुल गए हों, लेकिन राज्य में 11 लाख से ज्यादा बच्चे एवं किशोर कभी स्कूल नहीं गए या पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। यह तथ्य हाल ही शिक्षा विभाग के घर-घर जाकर किए गए सर्वे में उजागर हुए है। सर्वे के आंकड़ों पर विभागीय स्तर पर शोध जारी है, जो अगले वर्ष जनवरी में पूरा होगा। स्कूलों में मुफ्त शिक्षा, दोपहर का भोजन, नि:शुल्क पोशाक, साइकिलें, परिवहन कार्ड जैसी सुविधाएं देने के बावजूद 11 लाख से ज्यादा बच्चों की स्कूलों से बेरुखी नीति नियंताओं को आइना दिखा रहा है। यह संख्या इसलिए भी चौंकाने वाली है कि राजस्थान राजनीतिक, प्रशासनिक, भौगोलिक, प्राकृतिक रूप से अपेक्षाकृत शांत प्रदेश है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती शिक्षा के दौरान इन बच्चों-किशोरों को मजदूरी या कोई छोटा-मोटा पेशा ही अपनाना पड़ेगा।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी, गरीब परिवारों की मजबूरी, वे चाहते हैं कि वे बच्चे पढ़ने के बजाय कुछ कमाएं, ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को ज्यादा नहीं पढ़ाने की परंपरा, बीए, एमए तक पढ़े-लिखे लोगों के बेरोजगार रहने से पढ़ाई के प्रति मोह भंग होना और कई घरों में पढ़ाई का माहौल नहीं होने के कारण बच्चे स्कूलों से दूर है(दैनिक जागरण,जयपुर,23.11.2010)।
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