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23 नवंबर 2010

उत्तराखंडःप्री-बोर्ड परीक्षा राहत देगी या तनाव?

बोर्ड परीक्षा का परिणाम बेहतर करने और खुद का मूल्यांकन करने के लिए आयोजित की जाने वाली प्री-बोर्ड परीक्षा इस बार छात्रों को राहत के बजाय तनाव दे सकती है। विभाग का दावा है कि प्री-बोर्ड में पूरा सिलेबस शामिल किया जाएगा, जबकि हकीकत पर गौर करें तो अभी 50-60 प्रतिशत सिलेबस ही स्कूलों में पढ़ाया गया है। ऐसे में छात्रों का खुद मूल्यांकन कहीं उन्हें मानसिक तनाव में न झोंक दे।
सीबीएसई पाठ्यक्रम के साथ ही राज्य के सरकारी स्कूलों में प्री-बोर्ड परीक्षा का पैटर्न लागू किया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को बोर्ड परीक्षा से पहले अपना मूल्यांकन करना है। यह अपने उद्देश्य में सार्थक भी साबित हो सकता है, लेकिन जरूरी है कि स्कूलों में नियमित कक्षाएं चलें और सिलेबस समय से पूरा किया जाए। राज्य के सरकारी विद्यालयों में जनवरी माह में प्री-बोर्ड परीक्षाएं होनी तय हैं। विभाग का दावा है कि प्री-बोर्ड में पूरा सिलेबस शामिल किया जाएगा ताकि छात्रों को इसका पूरा लाभ मिले, लेकिन हालात पर गौर करें तो परीक्षा से पहले कोर्स पूरा कराया जाना संभव नहीं लग रहा है।
शिक्षकों की मानें तो अ‌र्द्धवार्षिक परीक्षा के बाद कक्षाएं न के बराबर ही चली हैं। पहले मूल्यांकन और परिणाम जारी करने में शिक्षक व्यस्त रहे, उसके बाद दीन दयाल उपाध्याय शैक्षिक पुरस्कार और अब राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में अधिकांश शिक्षक व्यस्त हैं। नवंबर माह लगभग बीतने को और 25 दिसंबर से शीतकालीन अवकाश तय हैं। इसके तत्काल बाद प्री-बोर्ड परीक्षाएं होनी हैं। ऐसे में साफ है कि छात्रों को आधे-अधूरे कोर्स के साथ प्री-बोर्ड का सामना करना होगा। विभागीय कार्यशैली और शिक्षकों के अन्य गतिविधियों में व्यस्त होने का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ेगा।
'प्री-बोर्ड परीक्षा जनवरी में कराई जानी तय है। परीक्षा में पूरा सिलेबस शामिल किया जाएगा। कई गतिविधियों व अ‌र्द्धवार्षिक परीक्षा में व्यस्तता के कारण सिलेबस लक्ष्य के अनुसार पूरा नहीं हो पाया है। इसके लिए स्कूलों के साथ बैठक कर रणनीति बनाए जाएगी ताकि समय से सिलेबस पूरा हो सके। प्रश्न पत्र बनाने का कार्य भी सिलेबस की प्रगति आने के बाद ही शुरू हो पाएगा।'
गीता नौटियाल, जिला शिक्षा अधिकारी(दैनिक जागरण,देहरादून,23.11.2010)

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