बिन्नागुड़ी के मध्य डुवार्स इलाके के न्यू डुवार्स भारती पाठशाला में नौकरी पाने के लिए चार बेरोजगार युवकों ने मुद्दा जान तक गंवाने की बना ली है। यह विदित हो कि आज से आठ महीने पहले पारा शिक्षक की नियुक्ति हेतु विद्यालय द्वारा अभ्यर्थियों की परीक्षा ली गयी थी। यह परीक्षा 19 अप्रैल 2010 को हुई थी जिसमें 30 लोगों में से चार युवकों को चुना गया था। इनके नाम हैं प्रेमचंद्र रविदास, चंदन कुमार पंजित, नूर मोहम्मद, हीरा लाल कुमार इन चारों युवकों की नियुक्ति में देर होने से असंतोष पनपने लगा तथा युवकों ने बार-बार अपनी नियुक्ति के बारे में स्कूल संचालन कमेटी व प्रधानाचार्य से जानकारी मांगी। इन बेरोजगार युवकों को करीब ढ़ाई महीने तक स्कूल की ओर से आश्वासन की दवारूपी खुराक मिलती रही। समय बीतते देख तथा बात बिगड़ने के भय की मद्देनजर रखते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य ने युवकों से नियुक्ति रद्द होने की जानकारी दी कि उपर से यह आदेश है कि नवनियुक्ति को रद्द किया जाए तथा आगामी नियुक्ति हेतु सूचना दी जाये। इस खबर को सुनते ही युवकों ने यह भांप लिया कि स्कूल संचालन कमेटी तथा प्रधानाचार्य की मिलीभगत से हमारी नियुक्ति रद्द की जा रही है। शिक्षित बेरोजगार युवकों ने यह फरियाद तथा सच्चाई को सामने रखने के लिए उन सभी दरवाजे को खटखटाया जहां से उसे न्याय मिलने की उम्मीद थी। युवकों ने पहले प्रधानाचार्य स्कूल संचालन कमेटी, विडियो, एसडीओ तथा जिला शिक्षा पदाधिकारी तक पत्र भेजकर अपनी नियुक्ति के लिए गुहार लगाया। लेकिन इसका कोई लाभ नहीं मिला। किसी ने ठीक ही कहा कि मरता क्या नहीं करता। इस उक्ति को चरितार्थ करने के लिए इन युवकों ने भूखे रहकर अपना प्राण त्यागना चाहा जिसका नाम रखा गया है भूख हड़ताल। इसके तहत युवकों ने स्कूल परिसर में गत दो अगस्त से पांच अगस्त तक भूख हड़ताल मे बैठा रहा। जिसके कारण युवक की हालत अगले दो दिन बाद बिगड़ने लगी। युवकों की हालत बिगड़ता देख बानरहाट पुलिस प्रशासन के ओर से आईसी एनके मजूमदार और सहायक बिडियो के मदद से स्कूल प्रशासन ने युवकों को वीरपाड़ा सरकारी अस्पताल में पहुंचाया। लेकिन युवकों ने सुबह हीं रात बीतते अपने से छुंट्टी लेकर अस्पताल से फिर स्कूल परिसदन में आकर भूख हड़ताल पर बैठ गया। उसके बाद इन युवकों ने कहा कि पांच अगस्त को एसडीओ और विडीओ के आश्वासन मिलने के बाद उनकी नियुक्ति की जायेगी। सभी युवकों ने अपना भूख हड़ताल वापस लिया। उसके बाद गत 25 अक्टूबर को सर्व शिक्षा अभियान के डिपिओ के साथ बैठक हुई। यह बैठक 28 अक्टूबर तक चला जिसके बाद इन युवकों को डिपिओ द्वारा 15 दिन का समय और दिया गया। जिसके बाद 15 दिन बीत जाने के बाद आज फिर सभी आला अधिकारियों को इन युवकों ने फिर से डिपीओ और अन्य अधिकारियों को पत्र दिया है। आज पत्र देने के बाद इन युवकों ने बताया कि शिक्षा विभाग से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक पत्र भेज कर हमने बताया है कि 28 नवम्बर तक हमारी नियुक्ति पर विचार नहीं हुआ तो हम लोग पुन: 29 नवम्बर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। आखिरकार युवकों ने यह ठान ही लिया है कि किस्मत में लिखा कलेश उसे याद क्या करना जहां बेदर्द हाकिम हो वहां फरियाद क्या करना। इसे सोंच युवकों ने मौत को लगे लगाने की ठान ली है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक अधिकारी इन युवकों को अधिकार दिलाते हैं या फिर इनके मौत का तमाशा देखना चाहते हैं। यहां एक सोंचने के विषय युवकों ने छोड़ रखा है। की आखिर ये युवक अपनी जिद के द्वारा किस तरह की सच्चाई समाज के सामने रखना चाहते हैं(दैनिक जागरण,बिन्नागुड़ी,23.11.2010)।
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