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24 नवंबर 2010

झारखंड : 239 इंजीनियरों के दामन दागदार

जल संसाधन विभाग के 239 इंजीनियरों के दामन दागदार हैं। कोई विभागीय कार्यवाही झेल रहा है तो कोई निलंबित हैं। किसी पर निगरानी में मामला दर्ज है तो कोई सीबीआई जांच के घेरे में है। इससे राज्य की महत्वाकांक्षी सुवर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना सहित कई योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। यह खुलासा सूचना के अधिकार कानून के तहत हुआ। इनमें से अधिकांश इंजीनियरों पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और गलत भुगतान करने का आरोप है, वहीं कुछ इंजीनियर रिश्वत कांड में फंसे हैं।

हो सकते हैं बर्खास्त
विभाग के संयुक्त सचिव आरपी सिन्हा ने कहा कि कई दागी इंजीनियर निलंबित हैं। उन्हें निलंबन अवधि में आधा वेतन मिल रहा है लेकिन काम नहीं हो रहा। अब सरकार यह विचार कर रही है कि छोटे-छोटे मामलों में फंसे इंजीनियरों का निलंबन रद्द कर उनसे काम लिया जाए और जिन पर गंभीर आरोप है उन्हें बर्खास्त कर दिया जाए। ताकि दूसरे इंजीनियरों की भर्ती हो और विभाग का काम सुचारू ढंग से चल सके।

इन पर निगरानी में केस
कार्यपालक अभियंता योगेश्वर राम, भोला राम, अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत्त) शिवबालक राम, सहायक अभियंता योगेश्वर पंडित, रामचंद्र राय, निर्मला दत्ता, दुधनाथ सिंह, अनिल कुमार सिंह, कनीय अभियंता सुदामा सिंह, सुशील जैन, कृष्णानंद प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनिल कुमार गुप्ता, राजेंद्र साहु, रामजन्म शर्मा, रामजन्म सिंह, जयंती सिंह, हरिहर प्रसाद सिंह, जेवियर सोरेन, अरविंद कुमार सिन्हा, नेसार अहमद खां व रामलखन मिश्र।

ये सीबीआई के घेरे में
जेई उग्रमोहन सिंह, रंजन प्रसाद चौधरी और परमानंद यादव।

इंजीनियरों के निलंबन, विभागीय कार्यवाही और मुकदमे में फंसे होने से परियोजना के काम पर विपरीत असर पड़ रहा है। निलंबन के कारण विभाग में इंजीनियरों की संख्या घट गई है। सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

सुदेश कुमार महतो, डिप्टी सीएम सह जल संसाधन मंत्री(दैनिक भास्कर,रांची,24.11.2010)

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