प्रदेश में नर्सो की भर्ती को लेकर राज्य शासन को एक बड़ा झटका लगा है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शासन द्वारा की गई 250 नर्सो की नियुक्ति निरस्त कर दी। राज्य सरकार ने कैबिनेट में हुए फैसले के आधार प्रदेश में 1932 नर्सो की भर्ती का निर्णय लिया था। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने 26 जुलाई 10 को विज्ञापन जारी कर केवल महिला नर्सो के लिए आवेदन बुलाए थे।
गत अगस्त में इंदौर सहित विभिन्न शहरों के करीब 45 युवकों की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र वर्मा ने हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चुनौती दी थी। युवकों का तर्क था कि विज्ञापन में पुरुष नर्सो की भर्ती का उल्लेख नहीं है और उन्हें काउंसिलिंग में आमंत्रित नहीं किया जा रहा है।
इन पदों पर सौ प्रतिशत महिलाओं की नियुक्ति नहीं की जा सकती। इसमें पुरुष नर्सो के पद भी आरक्षित किए जाएं। सुनवाई में शासन की ओर से अधिवक्ता विवेक फड़के ने तर्क दिया था कि महिला नर्सो की नियुक्ति शासन की नीति के अनुसार हो रही है।
स्टे के बावजूद की भर्तिया
दोनों पक्ष सुनकर न्यायालय ने केवल महिला नर्सो की काउंसिलिंग पर स्थगन आदेश के साथ पुरुषों को भी काउंसिलिंग में शामिल करने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा था कि वे संबंधित विभाग के पास जाएं,उन्हें काउंसलिंग में शामिल किया जाएगा। कोर्ट के आदेश पर गत 23 सितंबर को पुरुष आवेदकों को काउंसिलिंग में शामिल किया गया,किंतु कुछ को नियुक्ति दी जा रही थी और कुछ को नहीं।
वहीं,250 से अधिक महिलाओं के नियुक्ति आदेश भी जारी हो गए। याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर कोर्ट ने संबंधित अफसरों को अवमानना का नोटिस देकर पूछा था कि स्थगन के बावजूद नियुक्तियां कैसे की गई।
इस पर पिछले दिनों स्वास्थ्य संचालनालय भोपाल के संयुक्त संचालक व अन्य अफसर कोर्ट में पेश भी हुए थे।
पूरी नियुक्तियां निरस्त हुईं
इंदौर खंडपीठ के जस्टिस एससी शर्मा की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए पूरी नियुक्तियां ही निरस्त कर दी। इससे 250 महिलाओं की नियुक्ति स्वत: समाप्त हो गईं हैं। कोर्ट ने विभाग के प्रमुख सचिव व संबंधितों पर नाराजी भी जताई कि आदेश के बाद भी उल्लंघन कैसे कर लिया गया।
उल्लेखनीय है कि जिन महिलाओं की नियुक्ति हुई उनमें से अधिकांश को कार्यभार संभाले दो माह हो गए थे। अब वे भी अपील में जाने की तैयार कर रही हैं(दैनिक भास्कर,इन्दौर,25.11.2010)।
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