राजस्थान हाईकोर्ट ने आरएएस की मुख्य परीक्षा (वर्ष 2010) में निशक्त अभ्यर्थियों के लिए निर्धारित कोटे के अभाव में एक मामले में प्रार्थी को परीक्षा में प्रोविजिनल तौर पर बैठाने के आदेश दिए हैं।
यह आदेश न्यायाधीश गोविंद माथुर ने प्रार्थी श्रवण कुमार खुडखुडिया की याचिका पर प्राथमिक सुनवाई के तहत दिया। साथ ही इस मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) से जवाब तलब भी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता एसपी शर्मा ने तर्क दिया कि आरएएस एवं अधीनस्थ सेवाओं की प्री परीक्षा-2010 में विकलांग अभ्यर्थियों के संबंध में किसी प्रकार का अनुतोष नहीं दिया गया है। साथ ही कानून के तहत न तो विकलांग कोटे का निर्धारण किया गया है व न ही उनको लाभ देते हुए कट ऑफ मार्क्स जारी किए हैं। यह सर्वोच्च व उच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर जारी निर्णयों के विरुद्ध है(दैनिक भास्कर,जोधपुर,25.11.2010)।
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