राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के भर्ती के नियमों को सफेदा लगाकर फेरबदल करने के मामले की विधिमंत्री रामविचार नेताम ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुनील कुमार कुजूर से जांच रिपोर्ट भी तलब की है।
भास्कर ने किया था खुलासा: सीईओ दफ्तर के इस प्रकरण का खुलासा दैनिक भास्कर ने 17 नवंबर को किया था। श्री नेताम ने नियमों के मूल स्वरूप में परिवर्तन रोकने और नियमों में कांट-छाट करने के दोषियों पर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच की जाए। ज्ञात हो कि इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग के अवर सचिव की भूमिका पर संदेह है। उसने विधि मंत्री के अनुमोदन पर अपनी कलम चलाकर न सिर्फ नियमों में फेरबदल किया बल्कि सामान्य प्रशासन विभाग की जगह विधि विभाग भी लिख दिया है। प्रदेश में एमपी के भर्ती नियम अपनाए गए हैं। उन नियमों के अनुरूप ही सीईओ कार्यालय के नियमों का विधि मंत्री ने अनुमोदन किया है।
इसमें सहायक ग्रेड-1 का पद शत-प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने का प्रावधान है, लेकिन नियमों में सफेदा लगाकर 75 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 25 प्रतिशत पदोन्नति से भरने परिवर्तन कर दिया गया। अन्य नियमों से भी छेड़छाड़ की गई है। वित्त विभाग ने 24 मार्च 2009 को आदेश जारी कर सभी विभागों को भर्ती तथा पदोन्नति नियमों में छठवें वेतनमान का प्रावधान करने को कहा था। सीईओ दफ्तर विधि विभाग के अंतर्गत आता है इसलिए विधि मंत्री को यह फाइल 28 जुलाई 2010 को प्रस्तुत की गई। विभागीय मंत्री ने 4 अगस्त को भर्ती नियमों के छठे वेतनमान के प्रावधान का अनुमोदन कर दिया(जॉन राजेश पॉल,दैनिक भास्कर,रायपुर,24.11.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।