हमेशा विवादों में रहने वाले ओपन स्कूल ने इस बार चालीस हजार छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। करीब चालीस हजार बारहवीं के छात्र स्नातक की प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं दे पाएंगे। बावजूद इसके आला अधिकारियों को बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। राज्य ओपन स्कूल की अगस्त में हुई दसवीं-बारहवीं की परीक्षा में करीब एक लाख छात्र शामिल हुए थे। इसमें चालीस हजार छात्र बारहवीं के थे। ओपन स्कूल ने अक्टूबर में बारहवीं का परीक्षा परिणाम जारी करने की घोषणा की थी। यह परिणाम जारी होने के बाद छात्र कालेजों में आसानी से प्रवेश ले सकते थे। कालेजों में दाखिले की अंतिम तिथि भी तीस अक्टूबर निर्धारित की गई थी। दाखिले के तिथि निकल गई लेकिन ओपन स्कूल द्वारा बारहवीं का रिजल्ट घोषित नहीं किया गया। ओपन स्कूल के बारहवीं के कई छात्रों ने कालेजों में अस्थायी प्रवेश ले लिया था। इन छात्रों की स्नातक की प्रथम वर्ष की परीक्षाएं 17 दिसंबर से शुरू होना है। ओपन स्कूल द्वारा छात्रों का परीक्षा परिणाम जल्द जारी नहीं किया, तो सभी का साल खराब हो जाएगा।
हार्डडिस्क की खराबी बता रहा ओपन :
परीक्षा परिणाम में विलंब का कारण राज्य ओपन स्कूल हार्डडिस्क के खराब होने को बता रहा है। ओपन स्कूल का कहना है कि जिस कंपनी से रिजल्ट तैयार कराया गया है, वहां इसकी हार्डडिस्क जल गई है। ओपन के इस तर्क से कई सवाल जन्म ले रहे हैं। जिस कंपनी द्वारा यह महत्वपूर्ण काम किया गया उसके द्वारा इसकी कापी क्यों नहीं रखी गई। इतने बड़े काम के साथ उसका बैकअप सुरक्षित रखना जरूरी है। यह कार्य करने वाले तकनीकी विशेषज्ञों की माने तो ऐसे हालातों में हार्ड डिस्क का सिर्फ लॉजिक कार्ड जलता है। उसमें जो सीडी रहती है उसको कोई नुकसान नहीं होता। हार्ड डिस्क जली भी तो छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए रिजल्ट जल्द जारी करने के प्रयास करने चाहिए। बावजूद उसके ओपन के आला अधिकारी रिजल्ट जल्द देने में कोई रूचि नहीं दिखा रहे हैं। ओपन स्कूल के अध्यक्ष द्वारा भी छात्रों के भविष्य के प्रति कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है(दैनिक जागरण,भोपाल,22.11.20100।
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