सूबे में उच्च शिक्षा का स्तर संतोषजनक नहीं है। यह मानना है प्रदेश के विभिन्न विश्र्वविद्यालयों के कुलपतियों का। उच्च शिक्षा में सुधार के मद्देनजर रविवार को रुहेलखंड विवि में जुटे 18 विवि के कुलपति और उनके प्रतिनिधियों ने कई निर्णयों पर अंतिम मुहर लगाई। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई यदि उनका पालन होने लगा तो आने वाले दिनों में छात्रों को क्लासरूम में बैठकर लेक्चर अटेंड करने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी। वे कहीं से भी ऑन लाइन कक्षाएं ले सकेंगे। यही नहीं, उन्हें क्लास में क्या पढ़ाया गया, हूबहू डीवीडी के जरिए भी बताने की व्यवस्था होगी। नौ नवंबर को लखनऊ में हुए कुलपति सम्मेलन में उच्च शिक्षा में सुधार के लिए कई सुझाव दिये गये थे। कुलाधिपति ने भी कई सुझावों पर अपनी सहमति जाहिर की थी। कहा गया था कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति इन सुझावों पर चर्चा कर अपनी रिपोर्ट भेजें। इसके लिए कानपुर विवि के कुलपति प्रो.हर्ष सहगल की अध्यक्षता में एक समिति बनी है। इसी सिलसिले में यहां रविवार को हुई बैठक में सभी कुलपतियों ने माना कि सूबे में उच्च शिक्षा का स्तर संतोषजनक नहीं है। पढ़ाई के बाद उसका समुचित लाभ नहीं मिल पाता। शिक्षा में एकरूपता के प्रयास करने होंगे। समान पाठ्यक्रम, डिप्लोमा कोर्स संचालन के नियम परिवर्तन को लेकर भी चर्चा हुई। सहगल समिति के अध्यक्ष हर्ष सहगल ने बताया कि सबसे ज्यादा जोर वर्चुअल कक्षाओं को शुरु करने पर दिया गया। समिति के अध्यक्ष और कानपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. हर्ष सहगल ने बताया कि सभी निर्णयों पर विचार विमर्श के बाद फाइल तैयार की गई है। जिसे अग्रिम कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जायेगा। बैठक में चिकित्सा विवि की कुलपति प्रो.सरोज चूड़ामणि गोपाल और टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.कृपाशंकर समेत विभिन्न विश्र्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे(दैनिक जागरण,बरेली,22.11.2010)।
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