उत्तर मध्य रेलवे जोन के इलाहाबाद स्थित कंक्रीट स्लीपर प्लांट में काम करने वाले कर्मचारी अनिश्चित भविष्य को लेकर आशंकित हैं। प्लांट को बंद किये जाने को लेकर विरोध करते हुए कर्मचारियों ने अब रेलवे बोर्ड तक शिकायत की है। एनसीआर के सूबेदारगंज में बना कंक्रीट स्लीपर प्लांट में बना हुआ स्लीपर रेलवे की लाइनों में लगाया जाता है। यहां निर्मित स्लीपर को जोन के इलाहाबाद, झांसी, आगरा मंडल तक के ट्रैक पर लगाया जाता है। करोड़ों की लागत का स्लीपर इस प्लांट में बनाया जाता है। प्लांट में लगभग दो सौ कर्मचारी काम करते हैं। इनमें 103 नियमित और बाकी निजी कर्मचारी है। प्रधान मुख्य अभियंता द्वारा इस प्लांट को तीस अप्रैल 2011 को बंद किये जाने के आदेश जारी करने के बाद प्लांट के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। उनको अपना भविष्य अधर में लटकता दिख रहा है। इस समय प्लांट को तीन तरह के स्लीपर बनाने का टारगेट मिला हुआ है लेकिन प्लांट बंद करने को लेकर कर्मचारियों में निराशा का माहौल है। इसके पहले भी 1998-99 में स्लीपर प्लांट को बंद करने का निर्णय लिया गया था। तब रेलवे बोर्ड के सदस्य के दौरे के बाद 75 हजार स्लीपर बनाने का रिकार्ड बनाते हुए प्लांट ने रेल मंत्रालय से पुरस्कार भी जीता था। नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के असिस्टेंट सेक्रेटरी एसआई अख्तर बताते है कि केन्द्रीय अध्यक्ष शिवगोपाल मिश्र द्वारा इस बारे में महाप्रबंधक को भी अवगत कराया जा चुका है। रेलवे बोर्ड तक मामले को रखा गया है। बकौल शाखा अध्यक्ष बलबीर सिंह,सोचे-समझे बगैर विभागाध्यक्ष ने इसे बंद करने का निर्णय लिया(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,22.11.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।