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22 नवंबर 2010

हिमाचलः40 विद्यार्थियों पर एक अध्यापक का अनुपात रहेगा

प्रदेश के स्कूलों में छठी से लेकर आठवीं कक्षा तक शिक्षक-छात्र अनुपात अब 1:60 की बजाय 1:40 होगा। अध्यापक संगठन इस मामले में काफी समय से मांग उठाते रहे हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय उक्त अनुपात को लेकर सहमत हो गया है। स्कूलों में युक्तिकरण पूरा होने पर इसके बारे में आदेश जारी किए जाएंगे। युक्तिकरण में 30 सितंबर तक की छात्र संख्या को आधार बनाया जाएगा। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ की परिवेदना समिति की प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ आयोजित बैठक में इस मसले पर सहमति बनी। इसके अलावा अगले वित्तीय वर्ष में प्रारंभिक स्कूलों के खिलाडि़यों की डाइट मनी को बढ़ाने का भी फैसला लिया गया। बैठक में प्रदेश में बाल विज्ञान कांग्रेस को उपमंडल स्तर की बजाय शिक्षा खंड स्तर पर आयोजित करने का निर्णय भी लिया गया। कुल मिलाकर 27 विभिन्न मसलों पर चर्चा हुई, जिसमें से अनेक पर शिक्षा विभाग व हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ में सहमति बनी। परिवेदना बैठक में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें विभिन्न स्कूलों में 875 सीएंडवी के अध्यापकों के पद भरने, भाषा अध्यापकों के पदों पर जेबीटी व प्रभाकर अध्यापकों की भर्ती व पदोन्नति नियमों में छूट देने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा अनुबंध अध्यापकों के नियमितिकरण की अवधि को आठ साल के स्थान पर तीन साल करने को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजने का फैसला लिया। संघ के प्रदेश प्रधान पीआर सांख्यान ने कहा कि सरकारी स्कूलों में औसत बुद्धि छात्र से लेकर असाधारण मेधावी बच्चे भी होते हैं। निजी स्कूलों में तो प्रवेश ही मेरिट के आधार पर मिलता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में बेहतर परिणाम के लिए बहुत से बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए। अध्यापक-शिक्षक अनुपात इन्हीं बिंदुओं में से एक है। इस समय यह अनुपात 1:60 है। शैक्षणिक कार्यो के अलावा गैर शिक्षण कार्यो में व्यस्तता और एक कक्षा में 60 बच्चों को पढ़ाने से बेहतर परिणाम आना कठिन है(दैनिक जागरण,शिमला,22.11.2010)।

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