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22 नवंबर 2010

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोगः9 साल, 3 परीक्षाएं, उस पर भी विवाद

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग सरकार के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है। अफसरों, कर्मचारियों, अध्यक्ष एवं सदस्यों पर लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी सिविल सेवाओं के लिए केवल तीन बार ही परीक्षा आयोजित की जा सकी है। तीनों परीक्षाएं शुरुआत से ही विवादों में रहीं। परीक्षा के नियमों के विरुद्ध दो दर्जन से ज्यादा उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इस वजह से नतीजे आने में ही सालों लग रहे हैं।

राज्य बनने के बाद 23 मई 2001 को स्थापित पीएससी में केवल सिविल परीक्षा ही विवादों में नहीं रही इसके अलावा और भी कई परीक्षाएं हैं जिनसे कोई न कोई विवाद जुड़ा रहा। इस वजह से हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग समेत कई बड़े विभागों ने पीएससी से परीक्षाएं कराने का निर्णय ही वापस ले लिया। 2008 में आयोजित सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजों के बाद अब तक मुख्य परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकी है।

आयोग अपने ही बनाए नियमों के जाल में फंस जाता है। यही वजह है कि सभी बड़ी परीक्षाओं के मामले उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।

छत्तीसगढ़ के साथ ही बने उत्तरांचल और झारखंड में लगातार सिविल सेवाओं की परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश, उड़ीसा और आंध्रप्रदेश में भी हर साल परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। राज्य में परीक्षा न होने की वजह से राज्य के नौजवानों को दूसरे राज्यों की परीक्षाओं का ही सहारा रहता है। सभी जिलों से हर साल 30 हजार से ज्यादा छात्र दूसरे राज्यों की परीक्षाओं में शामिल होते हैं।

उम्र ही ज्यादा हो गई
आयोग के गठन होने के बाद नौ साल में नौ बार सिविल सेवाओं के लिए परीक्षाएं आयोजित होनी थी, लेकिन हुई केवल तीन बार। यही वजह है कि परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों उम्मीदवारों की उम्र ही परीक्षा में बैठने लायक ही नहीं रही। सामान्य वर्ग की उम्र 35 साल होने के बावजूद हजारों उम्मीदवार आने वाली सिविल सेवा में शामिल नहीं हो पाएंगे क्योंकि उनकी एज लिमिट क्रास हो गई है। ऐसे में युवाओं का अफसर बनने का सपना उनकी आंखों में ही रह गया।

नौ साल की प्रमुख परीक्षाएं
2003 छत्तीसगढ़ सिविल सेवा विवादित

2005 छत्तीसगढ़ सिविल सेवा विवादित

2007 जज परीक्षा विवादित

2008 छत्तीसगढ़ सिविल सेवा विवादित

2010 मेडिकल प्राध्यापक परीक्षा विवादित

2010 सहायक प्राध्यापक परीक्षा विवादित


ञ्चआने वाले समय पर सभी परीक्षाएं समय पर आयोजित करने की पूरी कोशिश की जा रही है। पिछले वर्षो में परीक्षाएं आयोजित न होने से उम्मीदवारों को नुकसान तो हुआ है। आने वाले महीनों में सीएमओ के अलावा कुछ और प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं-जेवियर तिग्गा, सचिव छग लोक सेवा आयोग
(असगर खान,दैनिक भास्कर,रायपुर,22.11.2010)

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