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24 नवंबर 2010

उत्तराखंडःपीसीएस(जे) में रिंकी ने किया टॉप

प्रोवेंसियल सिविल सर्विसेज(ज्यूडिशियल) में सफल सात प्रतिभागियों में से राज्य के चार युवाओं ने सफलता प्राप्त की। साक्षात्कार के बाद रुद्रपुर की रिंकी साहनी ने पहला स्थान प्राप्त किया। दूसरे स्थान पर देहरादून की शिवानी रहीं। सफल प्रतिभागियों का मानना है सफलता एकमात्र मंत्र मेहनत है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के मार्गदर्शन और सहयोग को दिया।
शहर की रिंकी साहनी ने उत्तराखंड पीसीएस-जे (न्यायिक सेवा) की परीक्षा में टॉप किया है। उसने हरियाणा में भी पीसीएस-जे की मुख्य परीक्षा क्वालीफाई कर ली है। हालांकि वह सेवा के लिए उत्तराखंड को तवज्जो देती हैं।
रेडीमेड व्यवसायी सुभाष साहनी की पुत्री रिंकी साहनी ने की शिक्षा रुद्रपुर में ही हुई। रिंकी ने सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा से एलएलबी टॉप किया। परीक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली में तैयारी की और वे अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के मार्गदर्शन को देती हैं। रिंकी ने इसी वर्ष हरियाणा की पीसीएस(जे) की मुख्य परीक्षा क्वालीफाई कर ली है। इस समय वे साक्षात्कार के लिए हरियाणा में हैं।
दूसरे स्थान पर रहीं देहरादून की शिवानी पसबोला ने दूसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की। विधानसभा सचिव महेशचंद्र की पुत्री शिवानी का मानना है कि सफलता के लिए मेहनत ही एकमात्र रास्ता है। निरंतर अध्ययन और सही मार्गदर्शन जरूरी है। साइंस बैकग्राउंड से होने बावजूद उन्होंने एलएलबी की और पीसीएस(जे) में सफलता दर्ज कर इस भ्रम को तोड़ा कि कला वर्ग के छात्र ही सिविल सेवा में सफल होते हैं।
परीक्षा में छठे में स्थान पर रहे ओएनजीसी से सेवानिवृत्त रामलाल धवन के पुत्र राजीव धवन ने डीएवी कॉलेज से बीकॉम व एलएलबी किया और पहले ही प्रयास में सफलता दर्ज की। उनका मानना है कि पढ़ाई के घंटों या महीनों का कोई फंडा नहीं है। इसके लिए हर व्यक्ति की क्षमता अलग-अलग होती हैं। वे भी अपने सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं।
ज्वालापुर निवासी शौकत अली के बेटे मोहम्मद याकूब भी अपनी सफलता का श्रेय माता पिता व भाई को देते हैं। वे 2005 से पीसीएस की तैयारी कर रहे हैं। रोजाना 10 से 12 घंटे नियमित पढ़ाई और एकाग्रता को वे सफलता का मंत्र मानते हैं(दैनिक जागरण,देहरादून,24.11.2010)।

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