हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त और शिक्षा विभाग मातृत्व अवकाश को लेकर अनुबंध कर्मचारियों के साथ दोहरे मापदंड अपना रहे हैं, जिससे हजारों महिला अनुबंध कर्मचारियों को अपने नवजात शिशुओं के पालन पोषण में परेशानियां झेलनी पड़ रही है। नियमित महिला कर्मचारियों को जहां 135 दिन के मातृत्व अवकाश का प्रावधान है वहीं अनुबंध महिला कर्मचारियों के लिए मात्र 84 दिन की मैटरनिटी लीव का ही प्रावधान है।
आरटीआई के तहत इस अनुबंध में महिला कर्मियों के अवकाश के संबंध में जानकारी मांगे जाने पर प्रदेश सरकार के कई विभाग अलग-अलग जानकारी दे रहे हैं। अवर सचिव शिक्षा ने आरटीआई में दी गई जानकारी में अवकाश में नियमित कर्मचारियों की तरह 135 दिन का अवकाश होने की जानकारी उपलब्ध कराई है। इसमें यह भी हवाला दिया गया है कि मैटरनिटी लीव के मामले में अनुबंध और नियमित महिला कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं बरता जा सकता। जबकि शिक्षा निदेशक ने आरटीआई में दी गई जानकारी में मैटरनिटी अवकाश के प्रावधान में केवल 84 दिन के अवकाश की सुविधा होने की बात कही है। प्रधान सचिव शिक्षा श्रीकांत बाल्दी का कहना है कि यह मामला वित्त विभाग की राय के लिए भेजा गया है । वहीं वित्त विभाग के विशेष सचिव अमिताभ गौतम का मानना है कि इस मामले के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वहीं मुख्य सचिव राजवंत संधू का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और इस पर गौर करने के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा।
सरकार की अनुबंध नीति में महिला कर्मचारियों के साथ मैटरनिटी लीव में भेदभाव बरते जाने को लेकर शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों शिक्षिकाएं सरकार की अनुबंध नीति को कोस रही हैं। केवल 84 दिन के अवकाश की सुविधा होने के कारण उनके नवजात शिशुओं को मां के दूध से महरूम होना पड़ रहा है। इसके अलावा सरकार की अनुबंध नीति में अधिकांश महिला शिक्षकों की पहली नियुक्ति दूरदराज के क्षेत्रों या फिर दूसरे जिलों में की गई है। स्थिति यह है कि अनुबंध नीति के नियमों में अगर एक दिन का भी अंतर आता है तो उनकी नौकरी पर खतरे की तलवार लटक जाती है(दैनिक भास्कर,शिमला,25.11.2010)।
अच्छी खबर है। धन्यवाद।
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