हार्वर्ड विश्वविद्यालय के जाने-माने विद्वान गुरुचरण दास ने कहा कि देश में कम कौशल वाली नौकरियों के लिए लोगों को तैयार करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है। हमारे देश में सरकारी स्कूल में बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों का प्रतिशत 94 प्रतिशत के करीब है। देहात में 54 प्रतिशत तथा शहरी इलाके में 24 प्रतिशत बच्चे विभिन्न कारणों से बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। अभाव के कारण बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों के अभिभावकों के लिए सरकार द्वारा शिक्षा वाउचर योजना शुरू करना चाहिए। इसके तहत बच्चे के जन्म के समय ही पिता को उसकी शिक्षा के लिए निश्चित राशि दी जाए, जिसका उपयोग वह अपने बच्चे की पढ़ाई पर कर सकें।
इसके साथ ही यह प्रयास किया जाए कि सरकारी स्कूल के शिक्षक पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करें। ये बातें उन्होंने इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के रजत जयंती वर्ष पर आयोजित 12वें व्याख्यान के दौरान कही। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत में हाल ही में शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया गया है। लेकिन अभी इसकी सफलता के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। गुणवत्ता व उत्कृष्टता पर ध्यान दिया जाना चाहिए। दास ने कहा कि भारत का आर्थिक भविष्य उज्ज्वल है। यह विश्व में दूसरी उभरता आर्थिक शक्ति हैं। इसकी जनसंख्या भी लगातार कम हो रही है। ये देश के लिए अच्छाई का संकेत दे रहे हैं। बावजूद इसके सरकार को शिक्षा की दिशा में खास कदम उठाने होंगे(दैनिक जागरण,दिल्ली,23.11.2010)।
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