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23 नवंबर 2010

चौधरी चरण सिंह विविःशिष्य ही नहीं, गुरुजी को भी पीएचडी मुश्किल

गुरुजी एवं शिष्यों के लिए अब पीएचडी करना बेहद मुश्किल होगा। विवि ने दोनों के लिए नियमावली पर सोमवार को घंटों गहन-मंथन किया। कई बिन्दुओं पर सहमति भी बनी।
वीसी प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में सोमवार को कैंप कार्यालय पर डेढ़ घंटे तक चली बैठक में पीएचडी की नियमावली तैयार करने को लेकर चर्चा हुई। नियमावली को अंतिम रूप देने के लिए एक समिति भी गठित की गयी। जिन महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर मंथन हुआ, उनमें रिसर्च सुपरवाइजर के लिए कम से कम दो साल का अनुभव जरूर होना चाहिए। जिन शोधार्थियों ने विवि से एमफिल किया है। उन्हें रिसर्च एंट्रेस टेस्ट से छूट होगी, लेकिन यह पांच साल के लिए ही होगा। शोधार्थी को पांच साल के अंदर अब पीएचडी के लिए अपना पंजीकरण कराना होगा। अपने विवि से एमफिल करने वालों को ही यह छूट मिलेगी।
गुरुजी के लिए भी पीएचडी कराना मुश्किल होगा। उनका एपीआई (ग्रेड प्वाइंट) तीन सौ अंक होना चाहिए। जिनका नहीं है, उन्हें तीन साल के अंदर प्राप्त करना होगा। वहीं, रिसर्च सुपरवाइजर के पांच शोध पत्र जनरल में प्रकाशित होने चाहिए। या उनके दस शोध पत्र कांफ्रेंस में प्रस्तुत किये गये हों। कांफ्रेस की प्रोसेडिंग में भी शामिल किया गया हो। साथ ही असिस्टेंट प्रोफेसर कुल चार व एसोसिएट प्रोफेसर छह तथा प्रोफेसर कुल आठ शोधार्थियों को ही एक साथ अब पीएचडी करा सकेंगे। वीसी की विशेष अनुमति से भी यह संख्या नहीं बढे़गी। साथ ही अब आरडीसी की जगह एक इंटरव्यू बोर्ड होगा। जिसमें संकाध्याध्यक्ष, एक विषय संयोजक व तीन विषय विशेषज्ञ एवं वीसी की ओर से उनका प्रतिनिधि होगा। यह इंटरव्यू बोर्ड ही पीएचडी के शोध शीर्षक व सिनोप्सिस को देखेंगे। सिनोप्सिस भी अब दो बाहय परीक्षक के पास जांचने के लिए जायेगी। दोनों यदि निरस्त करते हैं, तो पीएचडी नहीं हो पायेगी।
शोधार्थियों को भी सिनोप्सिस जमा करने से पहले चार क्वालीफाई कोर्स अब करने होंगे। इनमें पहला कोर्स है रिसर्च मैथोलाजी, दूसरा रिसर्च रिपोर्ट लिखने का तथा दो अन्य होंगे। कौन सा कोर्स शोधार्थी का करना है? इस बात का फैसला भी रिसर्च एडवाइजरी बोर्ड ही करेगा। वहीं, अब रिसर्च सेंटर का रिव्यू भी कराया जायेगा। यह देखा जायेगा कि वहां पांच साल के हिसाब से पुस्तकें एवं उपकरण आदि हैं। इन सब बिंदुओं पर गहन चर्चा की गयी है। मंगलवार को फिर इस नियमावली को अंतिम रूप देने के लिए बैठक हो रही है। फाइनल करने के बाद यह 26 को एकेडमिक कौंसिल की बैठक में रखी जायेगी। फिर सात दिसम्बर ईसी में पास होने के बाद यह राजभवन को भेजी जायेगी(दैनिक जागरण,मेरठ,23.11.2010)।

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