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23 नवंबर 2010

यूपीःअबकी विषयवार प्रपत्र देख तय होंगे परीक्षक

पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रक्रिया, पेपर प्रणाली में बदलाव के बाद अब माध्यमिक शिक्षा विभाग ने परीक्षकों के चयन का तरीका भी बदल दिया है। पिछले सत्र के मूल्यांकन में हुई लापरवाही और विद्यालयों से मिली परीक्षकों की सूची में गड़बड़ी के बाद विभाग ने इसके लिए काउंसिल ऑफ बोर्ड्स ऑफ स्कूल एजुकेशन से सलाह मांगी थी। कॉब्से की सलाह पर विभाग ने स्कूलों से शिक्षकों के नाम मांगने के बजाय विषयवार तैनाती और रिक्तियों का ब्योरा मांगा है। अधिकारियों के मुताबिक इसी लिस्ट के आधार पर हर विषय के अलग-अलग परीक्षक तैनात किए जाएंगे। परीक्षकों की दो लिस्ट बनेगी। परीक्षकों की अनुपस्थिति पर दूसरे लिस्ट से शिक्षकों को बुलाया जाएगा। विभाग ने प्रदेश के सभी पंजीकृत स्कूलों को एक प्रपत्र भेजा है जिसमें शिक्षकों के बारे में जानकारी मांगी गई है। प्रोफार्मा पर नौकरी ज्वाइन करने से अब तक की सभी जानकारियां देनी हैं। शिक्षकों ने किन विषयों से स्नातक, परास्नातक किया, कितनी बार प्रमोशन हुआ, परीक्षक के रूप में कितनी बार काम किया, कभी ब्लैक लिस्ट हुए या नहीं, प्रोफार्मा पर इसका ब्योरा देना है। प्रपत्र पर दी गई जानकारियों को प्रधानाचार्यों की तरफ से पहले से दी गई जानकारी को मिलाया जाएगा। विभाग ने यह फेरबदल हाईस्कूल, इंटरमीडिएट परीक्षा २०१० के मूल्यांकन में भारी गड़बड़ी मिलने के बाद किया है। पिछले सत्र के मूल्यांकन में बड़े पैमाने पर खामियां सामने आ रही हैं। देवरिया, बलिया, गाजीपुर, मेरठ में कई स्कूलों की शिकायत रही कि उनकी कॉमन मार्किंग हुई और जांच में आरोप सही पाए गए। बड़ी संख्या में स्क्रूटनी के मामले सामने आए और अब तक ढाई हजार से अधिक विद्यार्थी स्क्रूटनी में सफल घोषित किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मूल्यांकन में गड़बड़ी का एक बड़ा कारण परीक्षकों के चयन में अनियमितता रही। बोर्ड इस सत्र से जिला विद्यालय निरीक्षकों पर से निर्भरता खत्म कर रहा है। विभाग की तरफ से मांगे गए प्रपत्र के आधार पर सूची तैयार होगी। प्रक्रिया बदलने से उन शिक्षकों को परेशानी होगी जो डीआईओएस दफ्तर में जुगाड़ से अपना नाम परीक्षक की सूची में जुड़वा लेते थे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन के मुताबिक इससे मूल्यांकन में सुधार की उम्मीद है(अमर उजाला,इलाहाबाद,23.11.2010)।

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