इस बात के पुख्ता संकेत मिल रहे हैं कि छह महीने पहले लखीमपुर में हुई सेना भर्ती रैली में गोरखा कोटे से भर्ती हुए आठों युवक माओवादी हैं। इस युवकों के प्रमाण पत्र ही नहीं जांच में नाम-पते भी फर्जी निकले। बहराइच जिले के कस्बा नानपारा में संबंधित नामों का कोई भी युवक नहीं मिला। इस खुलासे के बाद अब सेना इंटेलीजेंस अलर्ट हो गई है। बता दें कि थल सेना भर्ती कार्यालय बरेली ने 21 से 28 मई 2010 तक लखीमपुर में भर्ती मेला लगाया था। इसमें भारतीय गोरखा युवकों का भी चयन हुआ था। चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भर्ती कार्यालय से शैक्षिक और निवास प्रमाण पत्र जांच के लिए संबंधित जिलों को भेजे गए। आठ युवकों के प्रमाण पत्र बहराइच भी भेजे गए, क्योंकि यह आठों युवकों ने बहराइच के कस्बा नानपारा में अपना निवास दिखाया था। जांच में सभी के प्रमाण पत्र फर्जी निकले। इसमें प्रकाश थापा, निशांत कठायत, रोमित थापा, राम बहादुर, कृष्ण गुरंग, सरेश थापा, सूरज सिंह, विशाल पूनमगर शामिल हैं। मामला पकड़ में आने के बाद स्थानीय प्रशासन ने इन सभी युवकों की खोज शुरू की तो पता चला कि इन नामों का कोई युवक वहां नहीं रहता। नानपारा के एसडीएम अयोध्या प्रसाद ने यह रिपोर्ट भर्ती कार्यालय को भेज दी है। साथ ही बताया कि युवकों के न मिलने से मुकदमा कायम नहीं हो सका। एसडीएम नानपारा की रिपोर्ट के बाद अब सेना खुफिया एजेंसियां उन युवकों को ढूंढने में जुट गई है। क्योंकि यह तय माना जा रहा है कि आठों युवक माओवादी थे और सेना में घुसपैठ करना चाहते थे।
दिसंबर में भर्ती के लिए विशेष एहतियात :
दिसंबर में होने वाली भर्ती में फिर से माओवादी गोरखा के रूप में घुसपैठ न कर सकें। इसके लिए सेना भर्ती कार्यालय सतर्क हो गया। यहां पर 11 जिलों के गोरखा और सिखों की भर्ती होनी है। इन युवकों के प्रमाण पत्रों की जांच के दौरान खास ध्यान रखा जाएगा(दैनिक जागरण,बरेली,23.11.2010)।
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