देश में स्टील कंपनियों के बढ़ते निवेश को देखते हुए कास्ट और फोर्ज रोल के कारोबार में बेहतर संभावनाएं हैं। कास्ट और फोर्ज रोल स्टील कंपनियों के लिए कच्चेमाल का काम करते हैं। देश में अगले पांच साल में स्टील की उत्पादन क्षमता मौजूदा क्षमता से करीब दोगुना हो जाने की उम्मीद है। इंडस्ट्री के अनुसार वर्ष 2015 तक देश में स्टील उत्पादन की क्षमता करीब १२ करोड़ टन हो जाएगी। जिसके तहत स्टील उद्योग को भारी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होगी। इस मांग को पूरा करने में कास्ट और फोर्ज रोल की अहम भूमिका होगी।
कास्ट और फोर्ज रोल निर्माण इकाई लगाने के लिए 200-300 करोड़ रुपये तक निवेश की जरूरत है। इसके लिए कच्चेमाल के रूप में स्क्रैप का उपयोग किया जाता है। जिसके लिए कारोबारी स्क्रैप को घरेलू बाजार के साथ-साथ आयात के जरिए भी मंगा सकते हैं। स्क्रैप से कास्ट और फोर्ज रोल का निर्माण किया जाता है। जो कि स्टील कंपनियों को कच्चे माल के रूप में दिया जाता है।
देश में कास्ट और फोर्ज रोल के उत्पादन के लिए किसी भी क्षेत्र में इकाई लगाई जा सकती है। हांलाकि इकाई लगाते वक्त इस बात का जरुर ध्यान में रखना चाहिए कि रोल की स्टील कंपनियों को आपूर्ति कम समय में हो। जिससे कि कंपनियों को समय पर रोल की आपूर्ति मिल सके। इसके साथ ही स्टील इकाइयों के पास रोल इकाई होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत में भी कमी आएगी। इन संभावनाओं को देखते हुए रोल इकाई छत्तीसगढ़, उड़ीसा, झारखंड,कर्नाटक जैसे राज्यों में लगानी चाहिए।
देश में अभी काफी कम कंपनियां है, जो कि रोल का उत्पादन करती है। ऐसे में जिस तरह से स्टील क्षेत्र में निवेश बढ़ रहा है, उसे देखते हुए कास्ट रोल और फोर्ज रोल में निवेश के बेहतर अवसर हैं। जिनका इस्तेमाल कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडस्ट्री, ऑटो सेक्टर, और कंस्ट्रक्शन उद्योग में किया जाता है। बढ़ती मांग को देखते हुए कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडस्ट्री, ऑटो सेक्टर क्षेत्र की कंपनियां लगातार अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है, जिसका असर भी इस उद्योग भी सकारात्मक पड़ेगा।
अवसर
देश में साल 2015 तक स्टील उत्पादन की क्षमता बढ़कर हो जाएगी 12 करोड़ टन
निवेश
कास्ट एवं फोर्ज रोल की इकाई लगाने में होता है लगभग 200 से 300 करोड़ निवेश
इस्तेमाल
कंज्यूमर ड्यूरेबल, ऑटो सेक्टर व कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में होता है कास्ट व फोर्ज रोल का इस्तेमाल
(बिजनेस भास्कर,दिल्ली,7.11.2010)
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