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10 नवंबर 2010

गुड़ के कारोबार में करिअर

सदियों से गन्ने की पेराई करके खेत में ही भट्टी बनाकर गुड़ तैयार किया जा रहा है लेकिन पारंपरिक तरीके से तैयार इस गुड़ का उपयोग जानवरों को खिलाने या मानव उपयोग में ही किया जाता है। अब समय के साथ गुड़ बनाने की विधि में भी बदलाव हो रहा है। नई विधियों से लड्डू या भेली के रूप में नहीं बल्कि नए आकार में गुड़ बनाया जा सकता है। आकर्षक आकार में ज्यादा स्वादिष्ट गुड़ का उत्पादन करके किसान सामान्य गुड़ से ज्यादा आमदनी हासिल कर सकते हैं।

नई तकनीक के अभाव में किसानों को सामान्य गुड़ से अच्छी आमदनी नहीं मिल पाती है। यही कारण है कि गुणों से भरपूर व मेडिसन शुगर का नाम हासिल करने के बाद भी किसान गुड़ से भरपूर फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। देश के कई इंस्टीट्यूट गुड़ बनाने की आधुनिक तकनीक विकसित करने के अलावा नए आकारों में गुड़ उत्पादन की विधियां तैयार करने में जुटी हुए हैं। इन संस्थानों में लखनऊ, कोल्हापुर, आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली एवं उत्तराखंड के पंतनगर में स्थित इंस्टीट्यूट शामिल हैं। गन्ने का समर्थन मूल्य कम मिलने की शिकायत करने वाले किसान गुड़ कारोबार से अच्छी आय हासिल कर सकते हैं।

नए प्रकार का गुड़ःसेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हारवेस्टिंग इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीफेट) के गुड़ टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. एस. के. नंदा के मुताबिक गुड़ अब आम दुकानों में ढेरी के रूप में बिकने वाला उत्पाद नहीं रह गया है। गुड़ बनाते समय उसे एक सेंटीमीटर मोटी परत के रूप में जमाकर कई तरह के आकार दिए जा सकते हैं। नए आकर्षक आकारों में बने गुड़ की बाजार में स्वीकार्यता बढ़ रही है। गुड़ का उपयोग चॉकलेट, केक, पेस्ट्री, रसकट बिस्कुट व अन्य कई तरह के बेकरी उत्पाद बनाने में होने लगा है। गुड़ बनाने के लिए नई टेक्नोलॉजी तैयार की गई है।

गुड़ बनाने की नई तकनीकःडॉ नंदा के मुताबिक गन्ने से गुड़ तैयार करने और इसकी बेहतरीन पैकिंग तक के काम में 3 से 4 लाख रुपये तक का निवेश होने की संभावना है। हालांकि किसान कम निवेश से भी गुड़ बनाकर सकते हैं। सबसे पहले जरूरी है कि गन्ने से रस निकालने की नई तकनीक। रोलर मशीन से किसान गन्ने से 65 से 68 फीसदी तक रस निकाल सकते हैं। गन्ने में करीब 70 फीसदी तक जूस रहता है। परंपरागत विधि से गन्ने से ज्यादा से ज्यादा 60 फीसदी तक ही रस निकल पाता है। रस निकालने इस मशीन की कीमत 35 से 40 हजार रुपये है।

इसके बाद रस को उबालने करने के लिए विशेष तरह की भट्ठी तैयार की गई है। जिसे थ्री पैन भट्ठी का नाम दिया गया है। इसमें जूस तीन चरणों में गरम होता है। रस को उबालने के बाद इसे छाना जाता है। करीब 10.5 क्विंटल रस उबालने की दैनिक क्षमता वाली भट्ठी पर खर्च 12 से 15 हजार रुपये तक आता है। एक समय में दो से तीन भट्ठियों की जरूरत पड़ती है। इसके बाद जरूरत पड़ती है मॉड्यूल की। जिससे गुड़ को अलग-अलग रूप दिए जा सकते हैं। शुगरकेन रिसर्च इंस्टीट्यूट लखनऊ ने ऐसे ही सांचे तैयार किये हैं। जिससे गुड़ को एक इंच के क्यूब में तैयार किया जा सकता है। प्रत्येक सांचे की कीमत 2000 से 3000 रुपये तक है।

पैकिंग दिलाएगा ज्यादा मूल्यःडॉ. नंदा के मुताबिक गुड़ में कैल्शियम, फॉसफोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम एवं आयरन, फॉलिक एसिड एवं बी काम्प्लेक्स जैसे विटामिन मौजूद होते हैं। जिसका उपयोग खाद्य उत्पादों के लिए बढ़ रहा है। इन गुणों से भरपूर गुड़ की घरेलू खपत के अलावा निर्यात मांग भी लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा आकर्षक पैकिंग और ब्रांड के जरिये गुड़ के प्रति ग्राहकों को आकर्षित किया जा सकता है। ब्रांड से गुड़ को एक अलग पहचान मिलेगी। पैकिंग में गुड़ को बाजार में 70-80 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचा जा रहा है। - नरेश बातिश naresh.batish@businessbhaskar.net
(नरेश बातिश,बिजनेस भास्कर,दिल्ली,8.11.2010)

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