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24 नवंबर 2010

प्रसार भारती एक्ट वापसी के लिए शुरू हुआ आन्दोलन

आकाशवाणी और दूरदर्शन से संबद्ध संस्था नैशनल फेडरेशन ऑफ आकाशवाणी एंड दूरदर्शन एंप्लाई (एनएफएडीई) के कर्मचारियों ने 23 नवंबर से 25 नवंबर तक 48 घंटों के लिए देश भर में काम का बहिष्कार करने का निर्णय किया है। यह हड़ताल विभिन्न मांगों के अलावा प्रसार भारती कानून को निरस्त करने के लिए की जा रही है।

मुंबई में एनएफएडीए हेड एवं स्टेशन इंजीनियर विवेक सिंह ने बताया कि इस हड़ताल में हमें 26 अन्य यूनियनों का भी सहयोग मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारा विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है और काम का बोझ अधिक होने से काम पर भी प्रभाव पड़ रहा है। पिछले करीब दस साल से प्रसार भारती ने कोई भी नई नियुक्ति नहीं की है। सिंह का कहना है, ' अब तक हमारे 60 फीसदी कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं। इस समस्या के बारे में प्रसार भारती को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन उनके कानों पर जूं तक नही रेंगा। इस वजह से हमें यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। '

इसके अलावा सिंह का आरोप है कि प्रसार भारती ने भर्ती के लिए कोई नियम नहीं बनाया है। मुंबई में आकाशवाणी के सभी चैनल मंगलवार सुबह 9 बजे से ही काम नहीं कर रहें हैं। 1992 में प्रसार भारती नाम की कमिटी बनाई गई थी। जिसे 1998 में संसद में पारित कर दिया गया था। तब से यह आकाशवाणी और दूरदर्शन को रेगुलेट कर रही है। बता दें कि आकाशवाणी के कुल 336 प्रसारण केंद हैं जो कि देश के 99 फीसदी लोगों तक पहंुच रखते हैं। दूरदर्शन देश के 94 फीसदी आबादी तक अपनी पहुंच रखता है। सिंह ने बताया कि अगर जल्द ही हमारी मांग नही मानी गई तो हम दिसंबर में आमरण अनशन पर चले जाएंगे(नवभारत टाइम्स,मुंबई,24.11.2010)।

दैनिक भास्कर की दिल्ली और चंडीगढ़ से रिपोर्टः
दूरदर्शन और आकाशवाणी की सेवाएं देशभर में मंगलवार को बुरी तरह प्रभावित हुई। यह स्थिति तकनीकी कर्मचारियों के 48 घंटे की देशव्यापी हड़ताल पर चले जाने के कारण बनी। आकाशवाणी के इतिहास में यह पहला मौका है जब घरों में ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन की सांकेतिक धुन नहीं गूंजी। इमरजेंसी के दौरान भी रेडियो की आवाज बंद नहीं हुई थी, लेकिन प्रसार भारती के गठन की 13वीं वर्षगांठ ही आकाशवाणी, दूरदर्शन सुनने-देखने वालों के लिए अशुभ साबित हुई।


मंगलवार को चंडीगढ़ समेत समूचे उत्तर भारत में आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों का प्रसारण थम गया। मंगलवार सुबह 9 बजे से ही आकाशवाणी खामोश हो गई। 10 बजे के बाद दूरदर्शन पर कार्यक्रमों का प्रसारण बंद हो गया। इसके पीछे वजह यह थी कि आकाशवाणी और दूरदर्शन के पूरे स्टाफ ने काम का बहिष्कार कर दिया था। नेशनल फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया रेडियो व दूरदर्शन के आह्वान पर आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्र चंडीगढ़ में पूरे स्टाफ ने काम का बहिष्कार किया। प्रसारण वीरवार सुबह 10 बजे तक बंद रहेगा।


उधर, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव पी.एन. भक्त ने दावा किया कि दूरदर्शन एवं आकाशवाणी राष्ट्रीय कर्मचारी संघ की हड़ताल के कारण देशभर में आकाशवाणी के 95 फीसदी और दूरदर्शन के 60 फीसदी केंद्रों में काम नहीं हुआ।

हड़ताल की वजह : दूरदर्शन एवं आकाशवाणी राष्ट्रीय कर्मचारी संघ प्रसार भारती कानून को वापस लिए जाने की मांग कर रहा है। यह कानून दूरदर्शन और आकाशवाणी के सभी कर्मचारियों पर लागू होता है, जबकि वे पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का हिस्सा होते थे।

उधर,गोरखपुर में भी,प्रसार भारती एक्ट से परेशान दूरदर्शन और आकाशवाणी के 22 संगठनों के आह्वान पर कर्मचारी और अधिकारी मंगलवार से चौबीस घंटे के कार्य बहिष्कार पर चले गये। इस दौरान ट्रांसमीटर पूरी तरह से बंद रहा। दिन भर किसी कार्यक्रम की रिकार्डिग नहीं हो सकी। आकाशवाणी के कर्मचारी कार्यालय में ताला लगा दिन भर गेट पर बैठक कर विरोध व्यक्त किया।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि पिछले 13 वर्षो से प्रसार भारती आर्थिक रूप से आत्म निर्भर नहीं हो सका। ऐसे में इसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने सरकार से तत्काल इस एक्ट को वापस कर दूरदर्शन और आकाशवाणी को अपने अधीन लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का हित इसी में निहित है।
इस बहिष्कार में सभी सेक्शन के कर्मचारी शामिल हुये(दैनिकजागरण,गोरखपुर,24.11.2010)।

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