उच्च न्यायालय ने कृषि अभियांत्रिकी स्नातक डिग्रीधारक अभ्यर्थी को उप्र लोक सेवा आयोग की संयुक्त राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2009 की 29 नवंबर 10 को होने वाली मुख्य परीक्षा में बैठने देने का निर्देश दिया है। आयोग ने याची की डिग्री को अर्हता श्रेणी में न मानते हुए प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने के बाद मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने याची को कृषि ग्रुप में प्राविधिक रूप में परीक्षा में बैठने देने का आदेश दिया है और याचिका पर जवाब मांगते हुए 11 जनवरी 11 की अगली सुनवाई की तिथि नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनील अम्बवानी तथा न्यायमूर्ति जयश्री तिवारी की खण्डपीठ ने आनंद कुमार राय की याचिका पर दिया है। याची कृषि गु्रप में आने वाले जिला गन्ना अधिकारी व विकास शाखा के लिए आयोग की संयुक्त परीक्षा में बैठा। उसे प्रारंभिक परीक्षा में 307.2 अंक प्राप्त हुए। सामान्य श्रेणी के न्यूनतम अंक 309.44 व कृषि गु्रप के 180.91 अंक निर्धारित किये गये। इससे अधिक अंक पाने वालों को मुख्य परीक्षा के लिए योग्य पाया गया। आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि याची ने गलत कोड भरा था। उसकी डिग्री अर्हता श्रेणी में नहीं रखी गई। न्यायालय ने आयोग से पूछा कि क्या कृषि अभियांत्रिकी डिग्री कृषि डिग्री के बराबर मानी जाएगी?(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,24.11.2010)
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