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10 नवंबर 2010

हिमाचलःअब आरक्षण में दोहरे फायदे का फर्जीवाड़ा नहीं

अब तक प्रदेश सरकार की ओर से निर्धारित आरक्षण में नौकरी के लिए दोहरा फायदा उठाते रहे रिटायर्ड फौजी अब ऐसा नहीं कर सकेंगे। अब या तो पिता को ही नौकरी में आरक्षण मिलेगा या फिर पुत्र को ही यह फायदा मिल सकेगा। राज्य सरकार ने आरक्षण के मामले में लचर भर्ती नियमों का फायदा उठाने वाले रिटायर फौजियों के लिए अब नए नियम-कायदे तय कर दिए हैं।
इसके तहत आर्मी से रिटायर हुए लोगों के बच्चों का नाम अब आरक्षित वर्ग में रोजगार कार्यालय में पंजीकृत कराने के लिए शपथ पत्र देना होगा। इस शपथ पत्र के सत्यापन के लिए भी नई प्रक्रिया तय कर ली गई है। सैनिक कल्याण बोर्ड के उपनिदेशक जगन्नाथ महाजन ने यहां इस मामले में खुलासा करते हुए कहा है कि इससे इस वर्ग की ओर से फर्जी तरीके से लिए जाने वाले लाभ अब नहीं मिल सकेंगे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पर्सनल विभाग की ओर से सैनिक कल्याण बोर्ड समेत सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों को इस बारे में ताजा निर्देश दिए गए हैं। इन पर तुरंत प्रभाव से अमल कराने के लिए कहा गया है।
जगन्नाथ ने यहां बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से जितने भी सरकारी सेवाओं में पद निकाले जाते हैं उनमें पूर्व सैनिकों के बच्चों को पंद्रह प्रतिशत के हिसाब से ही आरक्षण दिया जाता है। हालांकि प्रदेश सरकार की ओर से पहले से ही यह नियम बनाया गया है कि इस आरक्षण का फायदा एक परिवार में ही या तो पिता उठा सकता है या फिर उसकी संतान। लेकिन इस मामले में अधिकतर पूर्व सैनिकों की ओर से सही जानकारी विभागों को नहीं दी जाती है।
राज्य भर के रोजगार कार्यालय में भी पूर्व सैनिकों की संतानों को आरक्षण के वर्ग में पंजीकृत कर लिया जाता रहा है। इसमें नियमों का किसी ने कोई ख्याल नहीं किया है। उन्होंने बताया कि अक्सर पूर्व सैनिक इस तथ्य को छिपाते हैं और सरकारी सेवाओं में खुद भी रहते हुए अपनी संतान को सेवाओं में आरक्षण दिलवा देते हैं। उन्होंने बताया कि अब राज्य सरकार ने ताजा निर्णय में कहा है कि पूर्व सैनिकों के बच्चों का रोजगार कार्यालयों में पंजीकरण ऐसे नहीं होगा। इसके लिए उन्हें एक शपथ पत्र देना होगा जिसमें बाकायदा यह लिखा गया होगा कि संबंधित पूर्व सैनिक ने आरक्षण का फायदा नहीं लिया है।
इस शपथ-पत्र को भी सबसे पहले पूर्व सैनिक के क्षेत्र का पटवारी, पंचायत प्रधान, एनएसी या नगर पालिका, परिषद या फिर नगर निगम का अध्यक्ष सत्यापित कर देगा। इसी शपथ पत्र को बाद में संबंधित इलाके का तहसीलदार भी काउंटर साइन करेगा। तब जाकर इस डॉक्युमेंट के आधार पर एक तो सैनिक वेल्फेयर बोर्ड अपने यहां ऐसे अभ्यथियों को पंजीकृत करेगा। इसके बाद ही रोजगार कार्यालयों में भी पंजीकृत की सुविधा मिल सकेगी। महाजन ने बताया कि राज्य सरकार के सभी विभागों को इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए कहा गया है ताकि सरकारी सेवाओं में किसी भी प्रकार के दोहरे आरक्षण के फायदे में होने वाले फर्जीवाड़े को रोका जा सके(राजेश्वर ठाकुर,बिलासपुर,10.11.2010)।

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