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10 नवंबर 2010

यूपीःकर्मचारियों की त्रिदिवसीय कलमबंद हड़ताल शुरू

उत्तर प्रदेश फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के आह्वान पर त्रिदिवसीय सांकेतिक कलमबंद हड़ताल बुधवार से शुरू हो गई। इस दौरान 'समान कार्य के लिए समान वेतन लेकर रहेंगे' और 'हमारी मांगें पूरी हों' जैसे नारे लगाए गए। हड़ताल के उपरांत राजकीय मुद्रणालय के मुख्य द्वार पर सभा भी आयोजित की गई। अध्यक्षता महासंघ के मंडल अध्यक्ष रुद्रप्रताप सिंह ने की।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि शासन की उपेक्षापूर्ण दोहरी नीति के कारण छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट के बाद लिपिकीय संवर्ग का कर्मचारी अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है। वर्ष 1979 की कर्मचारियों की हड़ताल में सरकार से 'समान कार्य के लिए समान वेतन' का मिनिस्टीरियल फेडरेशन से समझौता हुआ था लेकिन आज तक उसका क्रियान्वयन नहीं हो सका। सचिवालय, लोकसेवा आयोग, ट्रेजरी, और हाईकोर्ट के लिपिकीय कर्मचारी आज जो वेतन पा रहे हैं, अन्य विभागों के कर्मचारी तुलनात्मक ढंग से इन विभागों की अपेक्षा बहुत पीछे हो गए हैं। इससे कर्मचारियों में घोर निराशा और रोष व्याप्त है। वक्ताओं ने कहा कि लिपिक संवर्ग के वेतनमान, ग्रेड पे आदि को इतना कम कर दिया गया है कि केंद्रीय कर्मचारियों की समानता तो दूर की बात, कार्यालय अधीक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के वेतन में कोई अंतर न रखते हुए इन सभी को 4200 का ग्रेड वेतन दे दिया गया है। इसमें तात्कालिक सुधार की जरूरत है। स्थिति बद से बदतर है। वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि मिनिस्टीरियल कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। अगर वेतन में तत्काल सुधार नहीं किया गया तो सरकार को आगामी चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आगामी दिनों में करो या मरो की नीति पर जोरदार हड़ताल की जाएगी। वेतन बढ़ाने के मामले में सांसद और विधायक तनिक भी देर नहीं करते। कहा गया कि इसी कड़ी में गुरुवार को पीडब्लूडी कार्यालय प्रांगण में केंद्रीय सभा होगी। तीन दिनी इस हड़ताल के बाद 16 नवंबर को जिला मुख्यालय पर रैली और 30 नवंबर को विधानसभा लखनऊ में विशाल रैली कर अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की जाएगी(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,10.11.2010)।

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