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24 नवंबर 2010

इलाहाबाद के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में एक भी प्रोफेसर नहीं

प्रदेश में शायद ही चिकित्सा शिक्षा की इससे ज्यादा बदरंग तस्वीर देखने को मिले। राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और प्राथमिक स्कूल की हालत में कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं है। इलाहाबाद का होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज इस बात का उदाहरण है और अपने आप में अलबेला भी। एक ऐसा चिकित्सा संस्थान, जहां पर एक भी प्रोफेसर नहीं। गंगापार फाफामऊ क्षेत्र में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर स्थापित इस मेडिकल कॉलेज में छात्रों को शिक्षा देने के नाम पर मीठी गोली दी जा रही। 250 छात्रों का भविष्य महज दस शिक्षकों पर टिका है। शिक्षकों के साथ ही संसाधनों की कमी भी शिक्षण कार्य में रोड़ा बनी हुई है। कॉलेज के प्रधानाचार्य की मानें तो ऐसी स्थिति अकेले यहीं नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलजों की है। लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज में इस समय चार रीडर और छह लेक्चरर हैं। इनके अलावा एक डिमांस्ट्रेटर है, जिनकी सेवानिवृत्ति के समय को विस्तार दिया गया है। कुछ माह बाद वह भी कॉलेज से विदा हो जाएंगे। कॉलेज में कुल बारह विभाग हैं, जिनमें शिक्षण कार्य सुचारू रखने के लिए प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर के कुल 37 पद सृजित हैं, लेकिन लंबे समय से खाली पदों पर आज तक नियुक्ति नहीं की जा सकी। कायदे से एक विभाग में एक प्रोफेसर, एक रीडर और एक लेक्चरर होना चाहिए, पर इस कॉलेज में प्रोफेसर तो छोडि़ए अधिकांश विभागों को रीडर भी नसीब नहीं हैं। पढ़ाई के नाम पर छात्र विशेषज्ञ शिक्षक के बिना ही विषय वस्तु के ज्ञानी होकर निकल रहे हैं। यही नहीं, एनाटॉमी विभाग में मानव संरचना समझने की पढ़ाई बिना शव पर अध्ययन कराए ही पूरी की जा रही है। दूसरी ओर,संस्थान में इलाज व्यवस्था भी भगवान भरोसे चल रही है। बिना चिकित्सा अधिकारी के अस्पताल में चार डॉक्टरों के बूते हर मर्ज की ओपीडी चल रही है। लैब है, लेकिन इसमें जांच का काम नहीं होता। टेक्नीशियन प्रबंधन के कार्यो को संभाल रहा है। इस बाबत, कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. केएन यादव बताते हैं कि शिक्षकों की कमी की वजह से एक शिक्षक को दो विषयों की पढ़ाई कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एमओ नहीं होने की वजह से इनकी ओपीडी में भी ड्यूटी बढ़ाकर काम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की समस्याओं से शासन को अवगत करा दिया गया है(अमित पांडे,दैनिक जागरण,इलाहाबाद,24.11.2010)।

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